चिराग पासवान का चाचा के सामने दांव, मंच पर मां को लाकर खेला इमोशनल कार्ड
Chirag Paswan: बिहार के हाजीपुर लोकसभा सीट पर चाचा और भतीजे के बीच रस्साकशी जारी है. लोजपा की इस परंपरागत सीट पर चिराग पासवान और पशुपति दावा कर रहे हैं.
Chirag Paswan: बिहार के हाजीपुर लोकसभा सीट पर चाचा और भतीजे के बीच रस्साकशी जारी है. लोजपा की इस परंपरागत सीट पर चिराग पासवान और पशुपति दावा कर रहे हैं. चिराग पासवान हाजीपुर सीट से अपनी मां रीना पासवान को चुनाव लड़ाने का ऐलान कर चुके हैं. चिराग माता को मंच पर ले आए हैं. ये उनका एक इमोशनल दांव हो सकता है. चिराग पासवान ने हाजीपुर में एक बड़ी रैली को संबोधित किया.
मां के मांंगा वोट
चिराग ने इस रैली को संबोधित करते हुए दो बार अपने पिता की रिकॉर्ड जीत को याद किया, साथ ही अपनी मां के लिए वोट देने की भी अपील कर दी. उन्होंने उम्मीद भी जताई कि हाजीपुर की जनता इस बार लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के लिए जब वोटिंग करेगी, नया रिकॉर्ड बनाएगी.
चिराग का इमोशनल कार्ड
ये पहला मौका था जब चिराग पासवान ने अपनी मां राजनीतिक मंच पर लाया.रीना को मंच पर लाकर चिराग इमोशनल कार्ड खेल गए. जनता रामविलास पासवान के साथ कनेक्ट हैं ऐसे में पुशुपति पारस को उनका विराध करना मुश्किल पड़ सकता है. पशुपति पारस भतीजे चिराग के खिलाफ खुलकर बोलते रहे हैं लेकिन रामविलास पासवान की हमेशा तारीफ ही की है. चिराग ने इस दांव से अब चाचा पशुपति पारस और गठबंधन का नेतृत्व कर रही बीजेपी को भी फंसा दिया है.
रामविलास पासवान की परंपरागत सीट
हाजीपुर की सीट रामविलास पासवान की सीट मानी जाती रही है. 2019 के चुनाव में रामविलास ने अपनी सीट से अपने भाई पशुपति पारस को उतार दिया. यहीं से जीतकर पशुपति पारस लोकसभा पहुंचे थे और रामविलास राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए. रामविलास ने पार्टी की कमान अपने बेटे चिराग को सौंप दी थी लेकिन उनके निधन के कुछ महीने बाद ही चाचा और भतीजा में पार्टी के नाम-निशान पर कब्जे की जंग छिड गई. पार्टी के नाम-निशान पर दोनों ने दावा कर दिया.
सबसे बड़ी समस्या ये है कि दोनों की ही पार्टियां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले एनडीए में हैं. दोनों हाजीपुर सीट छोड़ने को तैयार नहीं. दोनों के अपने-अपने दावे हैं, अपने-अपने तर्क हैं.