UGC के 2026 के इक्विटी नियमों की दोबारा होगी समीक्षा, केंद्र सरकार बनाएगी विशेष समिति; सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी
केंद्र सरकार UGC के 2026 के इक्विटी नियमों की समीक्षा के लिए विशेष समिति बनाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने सभी छात्रों के हितों को ध्यान में रखने पर जोर दिया.
केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2026 के इक्विटी नियमों की दोबारा समीक्षा के लिए एक विशेष समिति गठित करने पर विचार कर रही है. इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार छात्रों की चिंताओं को दूर करने के विकल्पों पर विचार कर रही है. उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र वर्ग को नियमों के कारण अलग-थलग, असुरक्षित या भयभीत महसूस नहीं होना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह के लिए टाली सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सभी छात्रों के हितों की रक्षा जरूरी है. युवा पीढ़ी की चिंताओं, कल्याण और सुरक्षा को फैसले का केंद्र बनाया जाना चाहिए. इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी.
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रोहित वेमुला और पायल तड़वी की मौत से जुड़ा मामला
यह मामला अबेदा सलीम तड़वी बनाम भारत संघ और इससे जुड़ी याचिकाओं का हिस्सा है. साल 2019 में रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं ने याचिका दाखिल की थी. दोनों ने कथित जातिगत भेदभाव का सामना करने के बाद आत्महत्या कर ली थी. याचिका में उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की मांग की गई थी.
जनवरी में UGC के नए नियमों पर लगी थी रोक
UGC ने जनवरी 2026 में 2012 के नियमों की जगह नए नियम अधिसूचित किए थे. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें प्रथम दृष्टया अस्पष्ट और दुरुपयोग की आशंका वाला बताते हुए लागू करने पर रोक लगा दी थी. फिलहाल 2012 के नियम लागू रखने का निर्देश दिया गया है.
विवाद का मुख्य कारण जातिगत भेदभाव की परिभाषा थी, जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के खिलाफ अनुचित व्यवहार पर ध्यान दिया गया था. सामान्य वर्ग के याचिकाकर्ताओं ने इसे भेदभावपूर्ण बताया था, जबकि कुछ पक्षों ने लक्षित सुरक्षा को जरूरी माना था.