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तरनतारन को 31 साल बाद मिला न्याय! सलाखों के पीछे पहुंचे पूर्व DIG और DSP; घर से उठा ले गई थी पुलिस

Tarn Taran Fake Encounter: साल 1993 में हुए तरनतारन के फर्जी एनकाउंटर के मामले में आज दोषी पूर्व डीआईजी और पूर्व डीएसपी को सजा सुना दी गई है. कल ही CBI कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराया था.

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Tarn Taran Fake Encounter Case
Courtesy: Social Media

Tarn Taran Fake Encounter: करीब 31 साल पहले हुए तरनतारन के फर्जी एनकाउंटर के मामले में CBI कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. मामले में कल ही तत्कालीन डीएसपी, सिटी तरनतारन तहत दिलबाग सिंह जो डीआईजी के पद से सेवानिवृत्त हैं और तत्कालीन एसएचओ, पीएस सिटी तरनतारन गुरबचन सिंह (डीएसपी के पद से सेवानिवृत्त) को दोषी ठहराया गया था. अब आज कोर्ट ने दोनो दोषियों को सजा सुना दी है.

करीब 31 साल पुराना है जब 22 जून 1993 को तत्कालीन डीएसपी, सिटी तरनतारन तहत दिलबाग सिंह ने गुलशन कुमार को उनके बच्चों के समेत को उठा ले गए थे. सभी को बाद में छोड़ दिया गया लेकिन कुछ दिनों बाद गुलसन के मौत की जानकारी हुई. पुलिस ने उनका संस्कार भी बिना सूचना कर कर दिया था.

किसे क्या सजा मिली?

कोर्ट ने दोषी ठहराने के बाद आज सजा का ऐलान कर दिया है. मोहाली की CBI स्पेशल कोर्ट ने सब्जी विक्रेता गुलशन कुमार के अपहरण और हत्या के दोषी पूर्व DIG को 7 साल जेल की सजा सुनाई है. इसके साथ ही पूर्व DSP गुरबचन सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.

क्या था केस?

मृतक के परिवार ने न्याय पाने के लिए बड़ी लंबी लड़ाई लड़ी है. तब जानकार उन्हें न्याय मिला है. तरनतारन के जंडाला रोड ते रहने वाले फल विक्रेता गुलशन कुमार के पिता चमन लाल की शिकायत पर 1996 में दर्ज किया गया था. शिकायत के अनुसार 22 जून 1993 का था जब डीएसपी दिलबाग सिंह के नेतृत्व में पुलिस उनके बेटे को जबरन उठा ले गई थी. उनके साथ उनके बेटे को ले गए थे. हालांकि बाद में केवल गुलशन के सब को छोड़ दिया गया था.

गुलशन को पुलिस ने रिहा नहीं किया. करीब एक महीने बाद 22 जुलाई 1993 को एनकाउंटर में उनकी हत्या कर दी गई. शिकायत में बताया गया कि पुलिस ने बिना सूचना के उनका अंतिम संस्कार कर दिया था. बाद में मामला CBI के पास पहुंचा. 3 दशक बाद आज मामले में दोषियों पर कार्रवाई हुई है.