नोटिस के बाद प्रशासन का एक्शन, अभिषेक बनर्जी के अवैध दफ्तर पर चला बुलडोजर; 3 JCB से गिराई जा रही पांच मंजिला इमारत

साउथ 24 परगना में अभिषेक बनर्जी से जुड़े कथित अवैध कार्यालय पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी है. पांच मंजिला इमारत को तीन जेसीबी मशीनों की मदद से गिराया जा रहा है.

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Km Jaya

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी से जुड़े एक कार्यालय पर शनिवार को प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी. दक्षिण 24 परगना जिले के अमताला बारुईपुर रोड स्थित इस पांच मंजिला भवन को कथित अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त किया जा रहा है. कार्रवाई के दौरान तीन जेसीबी मशीनों को लगाया गया और इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया. 

प्रशासन का कहना है कि भवन के निर्माण को लेकर पहले भी कई नोटिस जारी किए गए थे. संबंधित पक्ष से आवश्यक दस्तावेज और जवाब मांगा गया था, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई. इससे पहले भी कथित अवैध निर्माण को लेकर कई संपत्तियों को नोटिस जारी किए गए थे. 


कब की गई कार्रवाई?

शनिवार सुबह जैसे ही बुलडोजर मौके पर पहुंचे, स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई. घटनास्थल पर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ता भी पहुंच गए, जिससे कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया. स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी. 

जिला प्रशासन का क्या है कहना?

जिला प्रशासन का दावा है कि संबंधित भवन बिना आवश्यक स्वीकृति के बनाया गया था और निर्माण से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके. इसी आधार पर भवन को अवैध निर्माण की श्रेणी में रखते हुए कार्रवाई की गई. अधिकारियों के अनुसार पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है. 

यह कार्यालय विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से बंद बताया जा रहा है. ध्वस्तीकरण के दौरान प्रशासन ने आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा घेरा बनाया ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो. कार्रवाई के चलते क्षेत्र में यातायात भी कुछ समय के लिए प्रभावित रहा. 

इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. विपक्ष इसे कानून के पालन की कार्रवाई बता रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस पहले इस तरह के कुछ आरोपों और नोटिसों को राजनीतिक प्रेरित और तथ्यहीन बता चुकी है. मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है.