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Broadcasting Bill: डिजिटल न्यूज, OTT ब्रॉडकास्टिंग सर्विस को राहत, सरकार ने वापस लिया प्रसारण सेवा विधेयक

नए प्रसारण सेवा विधेयक का मकसद प्रसारण क्षेत्र को एक कानूनी ढांचा लाना और ओटीटी (डिजिटल मंच) सामग्री, डिजिटल समाचार और समसामयिक मामलों को भी इसके दायरे में लाना था. इसका दूसरा मसौदा इस साल जुलाई में तैयार किया गया.

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भारतीय प्रसारण एंव सूचना मंत्रालय ने प्रसारण सेवा विधेयक वापस ले लिया है. मंत्रालय ने 12 अगस्त को कहा कि विस्तृत विचार-विमर्श के बाद प्रसारण सेवा (विनियमन) विधेयक का नया मसौदा जारी किया जाएगा. इसके लिए 15 अक्तूबर तक सुझाव मांगे गए हैं. इस नए विधेयक का मसौदा पिछले साल नवंबर में जारी किया गया था. 

इसका मकसद प्रसारण  क्षेत्र को एक कानूनी ढांचा लाना और ओटीटी (डिजिटल मंच) सामग्री, डिजिटल समाचार और समसामयिक मामलों को भी इसके दायरे में लाना था. इसका दूसरा मसौदा इस साल जुलाई में तैयार किया गया. 12 अगस्त को कई हितधारकों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से फोन आया, जिसमें उन्हें बिना किसी प्रतिक्रिया के मसौदे की भौतिक प्रतियां वापस करने को कहा गया.

12 अगस्त की शाम को, एमआईबी ने कहा कि एक नया मसौदा अक्टूबर, 2024 के बाद प्रकाशित किया जाएगा. मंत्रालय फिलहाल विधेयक के 2023 के मसौदे पर 15 अक्टूबर तक टिप्पणियां आमंत्रित कर रहा है. यह विशेष मसौदा नवंबर 2023 में जारी किया गया था. एमआईबी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, मंत्रालय मसौदा विधेयक पर हितधारकों के साथ परामर्श की एक श्रृंखला आयोजित कर रहा है. 15 अक्टूबर, 2024 तक टिप्पणियां/सुझाव मांगने के लिए अतिरिक्त समय प्रदान किया जा रहा है. विस्तृत विचार-विमर्श के बाद एक नया मसौदा प्रकाशित किया जाएगा.

विचार-विमर्श के बाद लिया गया फैसला

सरकार ने 2024 के मसौदे पर हितधारकों के चुनिंदा समूहों के साथ विचार-विमर्श किया था, हालांकि इसने मसौदे को सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया. इसका विभिन्न समूहों ने आलोचना की थी जो सरकार से इसे जनता के लिए जारी करने का आग्रह कर रहे थे. अब वापस लिए गए 2024 बिल में न्यूज़ इन्फ़्लुएंसर्स को डिजिटल न्यूज़ ब्रॉडकास्टर और अन्य क्रिएटर्स को ओटीटी ब्रॉडकास्टिंग सर्विस के तौर पर नामित करने का प्रस्ताव था. 

अभिव्यक्ति की आजादी के हनन की चिंता

ड्राफ्ट बिल में कहा गया है कि इस प्रस्तावित कानून की अधिसूचना के एक महीने के भीतर ओटीटी ब्रॉडकास्टिंग सर्विस ऑपरेटर्स और डिजिटल न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स को अपने संचालन के बारे में केंद्र सरकार को सूचना देनी होगी. विधेयक में रचनाकारों के लिए कई अन्य अनुपालन आवश्यकताओं का भी प्रस्ताव किया गया है, जिसके कारण अभिव्यक्ति की आजादी और सेंसरशिप के हनन की चिंता उत्पन्न हो गई है.