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राजीव गांधी से जुड़ा बोफोर्स मामला खत्म, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की आखिरी याचिका

करीब चार दशक पुराने बोफोर्स मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम याचिका भी खारिज कर दी. इसके साथ ही यह बहुचर्चित रक्षा सौदा विवाद कानूनी रूप से समाप्त हो गया और आगे सुनवाई की संभावना खत्म हो गई.

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Kuldeep Sharma

भारत के सबसे चर्चित राजनीतिक और रक्षा सौदों में शामिल बोफोर्स मामला आखिरकार अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी लंबित याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि अब इस प्रकरण में आगे किसी तरह की न्यायिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं है.

चार दशक पुराने विवाद का कानूनी अंत

सुप्रीम कोर्ट ने 1986 की बोफोर्स तोप खरीद से जुड़े मामले में दाखिल अंतिम अपील भी खारिज कर दी. इसके साथ ही लगभग 40 वर्षों तक चले इस बहुचर्चित विवाद का कानूनी अध्याय पूरी तरह समाप्त हो गया. अदालत ने 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा हिंदुजा बंधुओं और बोफोर्स कंपनी को दी गई राहत के खिलाफ दायर चुनौती पर सुनवाई से इनकार कर दिया. न्यायालय का कहना था कि अब इस मामले में आगे बढ़ने का कोई औचित्य नहीं बचता. इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया पर विराम लग गया.

जांच क्यों नहीं पहुंच सकी नतीजे तक

जांच एजेंसियां वर्षों तक इस मामले में सबूत जुटाने का प्रयास करती रहीं, लेकिन अदालत में आरोपों को मजबूत आधार नहीं मिल सका. विदेशी दस्तावेजों का पर्याप्त सत्यापन नहीं हो पाया और कथित रिश्वत की रकम को सीधे आरोपियों से जोड़ने वाले प्रमाण भी सामने नहीं आए. जांच और कानूनी प्रक्रिया में हुई लंबी देरी ने भी मामले को कमजोर किया. समय बीतने के साथ कई अहम गवाह और परिस्थितियां बदल गईं, जिससे अभियोजन पक्ष का दावा अदालत में टिक नहीं पाया.


सीबीआई की अंतिम कोशिश भी रही बेअसर

मामले को आगे बढ़ाने के लिए सीबीआई ने अमेरिका से अतिरिक्त जानकारी जुटाने की कोशिश की. एजेंसी ने माइकल हर्शमैन से जुड़े रिकॉर्ड प्राप्त करने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए और विदेशी एजेंसियों से भी सहयोग मांगा. हालांकि इन प्रयासों से कोई निर्णायक साक्ष्य नहीं मिला. जांच पर करीब 250 करोड़ रुपये खर्च होने और अपील दाखिल करने में हुई लंबी देरी को लेकर भी एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे. अंततः अदालत के सामने ऐसा कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं हो सका, जिससे मामले को दोबारा खोला जा सके.

राजनीति और इतिहास में दर्ज रहेगा बोफोर्स

बोफोर्स विवाद का असर केवल अदालतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय राजनीति पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा. भ्रष्टाचार के आरोपों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया और 1989 के आम चुनाव में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई. दूसरी ओर, 1999 के कारगिल युद्ध में बोफोर्स तोप ने भारतीय सेना को रणनीतिक बढ़त दिलाकर अपनी उपयोगिता भी साबित की. इस तरह यह मामला एक ओर राजनीतिक विवाद का प्रतीक बना, तो दूसरी ओर रक्षा इतिहास में भी अपनी अलग पहचान छोड़ गया.