BMC Exit Poll: नतीजों से पहले भाजपा-शिवसेना के लिए गुड न्यूज, एग्जिट पोल में मिला प्रचंड बहुमत, ठाकरे खेमे को झटका

बीएमसी चुनाव के एग्जिट पोल में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है. सात साल बाद हुए चुनाव में बदले गठबंधन, मराठी अस्मिता और ठाकरे परिवार की सियासी पकड़ सबसे बड़े मुद्दे रहे.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: मुंबई की सत्ता का प्रतीक माने जाने वाले बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव में इस बार बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकता है. एग्जिट पोल संकेत दे रहे हैं कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन एशिया की सबसे अमीर नगर निगम पर कब्जा बरकरार रखने की ओर बढ़ रहा है. सात साल बाद हुए इन चुनावों में टूटे-बिखरे गठबंधन, नए समीकरण और मराठी अस्मिता की राजनीति ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया.

अधिकांश एग्जिट पोल के अनुसार भाजपा-शिवसेना गठबंधन बीएमसी में बहुमत के करीब या उससे आगे नजर आ रहा है. एक्सिस माय इंडिया ने गठबंधन को 131 से 151 सीटें मिलने का अनुमान जताया है, जबकि जेवीसी सर्वे में 138 वार्ड मिलने की बात कही गई है. अन्य सर्वेक्षणों ने भी महायुति को 107 से 154 सीटों के बीच बढ़त दिखाई है, जो एक मजबूत जनादेश की ओर इशारा करता है.

ठाकरे भाइयों की एकजुटता असरदार नहीं!

करीब 20 साल बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ आना राजनीतिक रूप से बड़ा घटनाक्रम माना गया था, लेकिन एग्जिट पोल में इसका खास असर नहीं दिख रहा. शिवसेना उद्धव गुट और मनसे गठबंधन को 58 से 68 सीटों तक सीमित बताया गया है. माना जा रहा है कि मराठी मानूस का मुद्दा उठाने के बावजूद यह गठबंधन मतदाताओं को व्यापक रूप से आकर्षित नहीं कर सका.

कांग्रेस और अन्य दलों की स्थिति

कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ आखिरी समय में गठबंधन किया, लेकिन एग्जिट पोल में उसे 12 से 16 सीटें मिलने का ही अनुमान है. अजित पवार की एनसीपी ने अकेले चुनाव लड़ा, जबकि महाविकास आघाड़ी के भीतर भी समन्वय की कमी दिखी. बदले हुए राजनीतिक हालात में छोटे दलों और नए गठबंधनों को अपेक्षित समर्थन मिलता नहीं दिख रहा.

बीएमसी पर शिवसेना की कमजोर होती पकड़

1985 से बीएमसी पर शिवसेना का दबदबा रहा है, केवल 1992 से 1996 के बीच यह क्रम टूटा था. हालांकि ताजा एग्जिट पोल संकेत देते हैं कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को ज्यादा समर्थन मिल रहा है. इससे ठाकरे परिवार की पारंपरिक पकड़ कमजोर पड़ती नजर आ रही है और पार्टी की विरासत पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

2017 के नतीजों से बदला परिदृश्य

2017 के बीएमसी चुनाव में शिवसेना 84 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और भाजपा को 82 सीटें मिली थीं. कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही थी. उस समय वोट शेयर में शिवसेना और भाजपा लगभग बराबरी पर थीं. अब एग्जिट पोल के रुझान दिखाते हैं कि मतदाताओं का झुकाव भाजपा-शिवसेना गठबंधन की ओर ज्यादा है, जिससे मुंबई की राजनीति की दिशा बदल सकती है.