NEET विवाद के बीच फिर चर्चा में आईं ये 7 फिल्में, आज भी खड़े कर देती हैं रोंगटे
NEET विवाद और शिक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच बॉलीवुड की कई फिल्में फिर चर्चा में हैं. 'रंग दे बसंती' से लेकर 'हुड़दंग' तक, ये 7 फिल्में छात्र आंदोलनों, राजनीति और बदलाव की लड़ाई को बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाती हैं.
मुंबई: देश में इन दिनों शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्र आंदोलनों को लेकर बहस तेज है. अलग-अलग मुद्दों पर छात्र अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं और शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं. ऐसे माहौल में बॉलीवुड की कई ऐसी फिल्में एक बार फिर चर्चा में हैं, जिन्होंने सिर्फ मनोरंजन नहीं किया बल्कि छात्रों के संघर्ष, राजनीति, सामाजिक बदलाव और व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने की कहानी को बड़े पर्दे पर मजबूती से पेश किया.
अगर आप ऐसी फिल्में देखना चाहते हैं जो युवाओं की सोच, आंदोलन और बदलाव की ताकत को दिखाती हैं, तो ये 7 फिल्में आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए.
1. रंग दे बसंती (2006)
छात्र आंदोलनों पर बनी फिल्मों की बात हो और रंग दे बसंती का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. आमिर खान, सिद्धार्थ, शरमन जोशी, कुणाल कपूर और आर. माधवन अभिनीत इस फिल्म में कुछ बेफिक्र कॉलेज छात्र अपने दोस्त की मौत के बाद भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ खड़े हो जाते हैं. फिल्म यह संदेश देती है कि जब युवा किसी मुद्दे पर एकजुट होते हैं तो बदलाव की शुरुआत हो सकती है. आज भी यह फिल्म युवाओं को सबसे ज्यादा प्रेरित करने वाली फिल्मों में गिनी जाती है.
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2. युवा (2004)
मणिरत्नम की युवा छात्र राजनीति और युवाओं की सामाजिक जिम्मेदारी को बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाती है. फिल्म में अजय देवगन, अभिषेक बच्चन, विवेक ओबेरॉय, रानी मुखर्जी, ईशा देओल और करीना कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं. फिल्म का संदेश साफ है कि व्यवस्था बदलनी है तो राजनीति से दूरी नहीं, बल्कि भागीदारी जरूरी है.
3. हजारों ख्वाहिशें ऐसी (2005)
सुधीर मिश्रा निर्देशित यह फिल्म 1970 के दशक की राजनीतिक उथल-पुथल और छात्र आंदोलनों की पृष्ठभूमि पर आधारित है. तीन छात्रों की जिंदगी के जरिए फिल्म बताती है कि सामाजिक बदलाव के लिए युवाओं को किन संघर्षों से गुजरना पड़ता है. यह फिल्म छात्र राजनीति और वैचारिक संघर्ष को गंभीर और यथार्थवादी अंदाज में पेश करती है.
4. गुलाल (2009)
अनुराग कश्यप की गुलाल विश्वविद्यालय की राजनीति, सत्ता की भूख और छात्र संगठनों के टकराव को बेहद वास्तविक तरीके से दिखाती है. फिल्म यह भी बताती है कि छात्र आंदोलन कई बार राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और सत्ता संघर्ष का हिस्सा बन जाते हैं.
5. हासिल (2003)
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति पर आधारित हासिल युवाओं, अपराध और सत्ता के गठजोड़ की कहानी कहती है. इरफान खान, जिमी शेरगिल और आशुतोष राणा की शानदार अदाकारी से सजी यह फिल्म दिखाती है कि छात्र संघ चुनाव किस तरह कई बार बाहुबल और अपराध से प्रभावित हो जाते हैं.
6. आरक्षण (2011)
प्रकाश झा की आरक्षण शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक न्याय और आरक्षण नीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर आधारित फिल्म है. फिल्म में शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव को दिखाया गया है. साथ ही यह भी बताया गया है कि शिक्षा से जुड़े फैसले छात्रों के भविष्य को किस तरह प्रभावित करते हैं.
7. हुड़दंग (2022)
सनी कौशल, नुसरत भरूचा और विजय वर्मा अभिनीत हुड़दंग 1990 के मंडल आयोग आंदोलन की पृष्ठभूमि पर आधारित है. फिल्म इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों की कहानी के जरिए दिखाती है कि कैसे सरकारी फैसलों के विरोध में देशभर में बड़े छात्र आंदोलन खड़े हुए थे. आज के समय में भी यह फिल्म शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सोचने के लिए मजबूर करती है.
समय बदलता रहा, लेकिन छात्रों के मुद्दे, शिक्षा व्यवस्था, राजनीति और बदलाव की मांग आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं. यही वजह है कि रंग दे बसंती, युवा, हासिल, गुलाल, आरक्षण, हजारों ख्वाहिशें ऐसी और हुड़दंग जैसी फिल्में आज भी दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती हैं. ये फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि समाज, लोकतंत्र और युवाओं की भूमिका पर गंभीर सवाल भी उठाती हैं.