'नाकाबिल नेता ने राष्ट्रपति को राजनीतिक झगड़े में घसीटने की कोशिश की', राहुल गांधी पर भड़की BJP
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं की मुलाकात के बाद BJP ने कांग्रेस नेता पर हमला बोला है. BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को राजनीतिक लड़ाई में घसीटने की कोशिश की.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मुलाकात को लेकर BJP और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है. BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने राष्ट्रपति को राजनीतिक लड़ाई में घसीटने की कोशिश की. पात्रा ने यह सवाल भी उठाया कि अगर विपक्ष के पास कथित 'वोट चोरी' के सबूत मौजूद थे, तो शुक्रवार को राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान उन्हें पेश क्यों नहीं किया गया.
संबित पात्रा ने कहा कि राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपना एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है, लेकिन राहुल गांधी ने इसे राजनीतिक ड्रामे में बदल दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत को लेकर ऐसी बातें कहीं, जिससे यह संदेश गया कि राष्ट्रपति विपक्ष के आरोपों से सहमत हैं.
BJP नेता ने क्या किया सवाल?
BJP नेता ने सवाल किया कि विपक्ष पिछले करीब एक साल से चुनावी गड़बड़ियों और 'वोट चोरी' के आरोप लगा रहा है, तो फिर राष्ट्रपति से मुलाकात के समय सबूत क्यों नहीं दिए गए. पात्रा ने कहा कि अगर सबूत बाद में दिए जाने हैं, तो बिना सबूत के राष्ट्रपति से मिलने का उद्देश्य क्या था.
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राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद क्या बोले राहुल गांधी?
दरअसल 9 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, ममता बनर्जी और INDIA ब्लॉक के अन्य नेताओं का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिला था. प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर अपनी आपत्तियां राष्ट्रपति के सामने रखीं. विपक्षी नेताओं ने एक ज्ञापन भी सौंपा.
राहुल गांधी ने मुलाकात के बाद कहा कि वह इस बात से हैरान थे कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के 'वोट चोरी' के आरोपों को खारिज नहीं किया. राहुल के मुताबिक, राष्ट्रपति ने कथित चुनावी गड़बड़ियों के सबूत मांगे हैं. उन्होंने दावा किया कि विपक्ष इन आरोपों से जुड़े सबूत जुटाकर आगे पेश करेगा.
विपक्ष ने रखीं चार प्रमुख मांगें
INDIA ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग समेत चार मांगें रखीं. इनमें मतदाता सूची में चल रही Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया को रोकना, चुनावों में बैलेट पेपर की वापसी और पिछले दो वर्षों में हुए विधानसभा चुनावों की समीक्षा जैसी मांगें शामिल थीं.
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े अपने फैसलों और प्रक्रियाओं का बचाव किया है और कहा है कि संस्थागत स्तर पर मतभेद होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है.
राष्ट्रपति के रुख पर भी सामने आया विवाद
राहुल गांधी के बयान के बाद राष्ट्रपति भवन से जुड़े सूत्रों ने उनके दावे को गलत और दुर्भाग्यपूर्ण बताया. वहीं, विपक्षी नेताओं का कहना है कि राष्ट्रपति ने उनकी बात सुनी और कथित 'वोट चोरी' से जुड़े सबूत पेश करने को कहा. इस तरह राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत की व्याख्या को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग सामने आए हैं.