बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मौसम की गतिविधियां एक बार फिर बढ़ने लगी हैं. अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के कमजोर पड़ने के बीच दक्षिण अंडमान सागर में कम दबाव का नया क्षेत्र बन गया है. मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दो दिनों में यह सिस्टम और मजबूत हो सकता है. इसके डिप्रेशन में बदलने की संभावना जताई गई है, हालांकि इसके आगे चक्रवात बनने को लेकर अभी कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है.
29 अक्टूबर की सुबह जारी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के बुलेटिन में इस नए सिस्टम की जानकारी दी गई. इसके बनने के बाद अब इसकी दिशा और तीव्रता पर नजर रखी जा रही है. दूसरी ओर, चक्रवात ‘अर्नब’ का असर कमजोर होकर दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे सटे दक्षिण ओडिशा के क्षेत्र में डिप्रेशन के रूप में बना हुआ है. ऐसे में अगले कुछ दिन मौसम की निगरानी के लिहाज से अहम रहेंगे.
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण अंडमान सागर और आसपास के इलाकों में ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से 29 अक्टूबर की सुबह करीब 5:30 बजे कम दबाव का क्षेत्र बना. यह मौसमी गतिविधि आगे बढ़ते हुए ज्यादा संगठित हो सकती है. इसी वजह से मौसम वैज्ञानिक इसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं.
IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, नया सिस्टम अगले 24 घंटों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है. इसके बाद अगले 24 घंटों के दौरान दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्रों में इसके डिप्रेशन में बदलने की संभावना है. इसकी वास्तविक तीव्रता और आगे की दिशा पर नजर रखना जरूरी होगा.
कम दबाव का क्षेत्र मजबूत होकर डिप्रेशन बन सकता है, लेकिन इसका चक्रवात में बदलना अभी तय नहीं है. खबर में दी गई जानकारी के अनुसार, यदि यह सिस्टम चक्रवात का रूप लेता है, तो इसका नाम ‘मुरासु’ होगा. फिलहाल मौसम विभाग ने इसके चक्रवात बनने को लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया है.
नए सिस्टम का ओडिशा के तटीय और अंदरूनी इलाकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसे लेकर अभी कोई विशेष पूर्वानुमान जारी नहीं किया गया है. मौसम विज्ञान केंद्र भुवनेश्वर के वैज्ञानिक स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. सिस्टम की दिशा और मजबूती में होने वाले बदलाव के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है.
दूसरी ओर, अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ अब कमजोर हो चुका है. इसका अवशेष दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे सटे दक्षिण ओडिशा के ऊपर डिप्रेशन के रूप में केंद्रित है. IMD के मुताबिक, रायपुर और संबलपुर में लगे डॉप्लर मौसम रडार की मदद से इस सिस्टम की लगातार निगरानी की जा रही है. मौसम की गतिविधियों पर नजर रखना फिलहाल जरूरी है.