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'ओह शिट...', अजित पवार का विमान कैसे क्रैश हुआ था; AAIB की जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा

जांच एजेंसी को कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) से कुछ अहम संकेत मिले हैं. दुर्घटना से ठीक पहले पायलट की घबराहट भरी आवाज ओह शिट… ओह शिट रिकॉर्ड हुई.

Anuj

मुंबई: महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे के लगभग एक महीने बाद एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी कर दी है. इस हादसे में एनसीपी नेता अजित पवार समेत पांच लोगों की जान चली गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्घटना के समय कम दृश्यता और एयरस्ट्रिप पर सुरक्षा संबंधी कमियां मुख्य वजहें रही है.

जांच में सामने आया कि चार्टर्ड विमान बारामती एयरस्ट्रिप पर दूसरी बार इमरजेंसी लैंडिंग का प्रयास कर रहा था. उसी दौरान विमान नियंत्रण खो बैठा और दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसे में अजित पवार के अलावा दोनों पायलट, एक सुरक्षा कर्मी और फ्लाइट अटेंडेंट की भी मौत हुई. रिपोर्ट में कहा गया कि हादसे के समय हवा सामान्य थी और दृश्यता लगभग 3 किलोमीटर दर्ज की गई थी.

जांच एजेंसी को क्या संकेत मिले?

जांच एजेंसी को कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) से कुछ अहम संकेत मिले हैं. दुर्घटना से ठीक पहले पायलट की घबराहट भरी आवाज ओह शिट… ओह शिट रिकॉर्ड हुई. हालांकि, रिकॉर्डर आग से क्षतिग्रस्त हो गया है और पूरा डेटा निकालने के लिए निर्माता कंपनी हनीवेल की तकनीकी मदद ली जा रही है. इसके साथ ही सॉलिड स्टेट फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (SSFDR) से डेटा डाउनलोड कर विश्लेषण जारी है. कॉकपिट रिकॉर्डर का बाकी डेटा निकालने में अमेरिकी एजेंसी NTSB भी सहयोग कर रही है.

कर्मचारियों के बयान दर्ज

यह जांच अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के नियमों के अनुसार की जा रही है. संबंधित ऑपरेटर कंपनी वीएसआर वेंचर्स के कर्मचारियों और अन्य लोगों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं. दुर्घटनाग्रस्त विमान के मलबे को सुरक्षित स्थान पर रखकर तकनीकी परीक्षण किया जा रहा है. जांच टीम ने विमान की एयरवर्थिनेस, संचालन प्रक्रिया और सुरक्षा दस्तावेज भी जब्त कर लिए हैं.

AAIB ने क्या सुझाव दिया

AAIB ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को सुझाव दिया है कि जिन छोटे हवाई अड्डों पर निजी और वीआईपी उड़ानें ज्यादा होती हैं, वहां लैंडिंग सहायता उपकरण और मौसम संबंधी सुविधाएं मजबूत की जाएं. और साथ ही ऐसे एयरफील्ड्स को सुरक्षित संचालन के लिए लाइसेंस देने पर विचार करने की भी सलाह दी गई है. जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि बिना नियंत्रण वाली हवाई पट्टियों पर उड़ान संचालित करने वाले ऑपरेटरों को मानक संचालन प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करना चाहिए और मौसम अनुकूल होने पर ही उड़ान की अनुमति दी जानी चाहिए.