नई दिल्ली: 2002 के गोधरा कांड के तीन दोषियों की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बहुत गंभीर घटना थी और यह कोई अकेली मौत का मामला नहीं था. तीनों दोषियों की उनकी विशिष्ट भूमिका को ध्यान में रखते हुए अदालत उन्हें जमानत नहीं दे सकती है.
गोधरा में ट्रेन जलाने के तीन दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी. जिस पर सोमवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया. फिलहाल यह तीनों दोषी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं. इस मामले की सुनवाई CJI डीवाई चंद्रचूड़, जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की बेंच ने किया. गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली इस याचिका को SC ने दूसरी बेंच के पास लिस्टिंग के लिए परमिशन दे दी है.
27 फरवरी, 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के S-6 कोच में गुजरात के गोधरा स्टेशन पर आग लगा दी गई थी. इसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी जिनमें ज्यादातर कार सेवक थे जो अयोध्या से लौट रहे थे. इस घटना के बाद 28 फरवरी से 31 मार्च 2002 तक गुजरात के कई इलाकों में दंगा भड़का था. जिसमें 1200 से अधिक लोग मारे गए थे. इस मामले में 1500 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोषियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने अदालत को बताया कि पिछली बार 12 में से 8 लोगों को जमानत दे दी गई थी. अदालत ने कहा कि जिन दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया था उन्हें जमानत नहीं दी गई.
इसके बाद CJI ने सुनवाई करते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही कहा था कि जिनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदला जाएगा उनको जमानत नहीं दी जाएगी जिन्होंने जलती ट्रेन पर पेट्रोल डालने की भूमिका निभाई थी उनको भी जमानत नहीं मिलेगी. तीनों के खिलाफ विशिष्ट आरोप हैं और ये मामला बहुत ही गंभीर है.
यह भी पढ़ें: पीएम मोदी के पचरंगी पगड़ी के सियासी रंग की कहानी, क्या है राजस्थान से चुनावी कनेक्शन?