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Ayodhya Ke Ram: आने वाले वक्त में भारत को एकजुट करेगा राम मंदिर! रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले किसने कही ये बात?

अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन और राम लला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. इस कार्यक्रम में संतों समेत सभी क्षेत्रों के 8,000 से ज्यादा गणमान्य लोग शामिल होंगे.

Naresh Chaudhary

Ayodhya Ke Ram: अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन को लेकर भारत ही नहीं दुनिया भर में तैयारी चल रही है. कह सकते हैं कि दुनियाभर की निगाहें राम मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम पर हैं. ऐसे में भारतीय-अमेरिकी पत्रकार और विदेश नीति विशेषज्ञ फरीद जकारिया ने उम्मीद जताई है कि राम मंदिर उद्घाटन समारोह देश को विभाजित करने के बजाय एकजुट करने की दिशा में काम कर सकता है. इसके साथ ही उन्होंने हिंदू धर्म के बारे में भी अपने विचार रखे.

राम लला की प्राण प्रतिष्ठा पर विदेशी विशेषज्ञ ने रखी अपनी राय

जानकारी के मुताबिक दावोस में विश्व आर्थिक मंच के मौके पर एक प्राइवेट न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म दुनिया में सबसे सहिष्णु धर्म है. 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान श्री राम लला की 'प्राण प्रतिष्ठा' के बारे में फरीद जकारिया ने कहा कि मुझे खुशी है. भारत में इस तरह की सकारात्मक भावना को देखकर भारतीय होने पर भी गर्व है. उन्होंने कहा कि मैं आशा करता हूं इसे देश को विभाजित करने के बजाय एकजुट करने की दिशा में मोड़ा जा सकता है.

बता दें कि अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन और राम लला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. इस कार्यक्रम में संतों समेत सभी क्षेत्रों के 8,000 से ज्यादा गणमान्य लोग शामिल होंगे. जकारिया ने कहा कि भारत हमेशा से एक पारंपरिक समाज रहा है, लेकिन फिर भी यहां बहुत पितृसत्तात्मक देश रहा है. 

जकारिया बोले- दुनिया में हिंदू धर्म सबसे ज्यादा सहिष्णु

जकारिया ने कहा कि भारत की श्रम शक्ति में महिलाओं की भागीदारी सऊदी अरब की तुलना में कम है. क्योंकि भारत में परिवार की संरचना काफी परंपरागत है. इसलिए यहां प्रोत्साहन की काफी जरूरत है. जकारिया ने इस दौरान हिंदू धर्म की काफी तारीफ की. कहा कि दुनिया में हिंदू धर्म सबसे ज्यादा सहिष्णु है. राजनीतिक टिप्पणीकार और लेखक जकारिया ने कहा कि आप शाकाहारी या मांसाहारी हो सकते हैं. आप एक, तीन या फिर सौ देवताओं में विश्वास कर सकते हैं. ऋग्वेद में ऐसे बहुत से अंश हैं जो अपनी उदारता की दृष्टि करते हैं.