एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी फिर चर्चा में हैं. उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा वंदे मातरम को राष्ट्रीय गाल जन गण मन के बराबर दर्जा देने के फैसले की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने इसको लेकर कहा है कि यह देश यहां रहने वाले लोगों का है और इसे किसी धर्म या देवी-देवता से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.
जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई पहली केंद्रीय कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है. सरकार ने राष्ट्रीय सम्मान संरक्षण अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत 'वंदे मातरम्' पर भी वही नियम और संरक्षण की पाबिंदियां लागू हो जाएंगी जो अभी तक राष्ट्रीय गान पर लागू हैं.
Vande Mataram is an ode to a goddess. It cannot be treated on par with the national anthem. Jana Gana Mana celebrates India and its people, not a particular religion. Religion ≠ nation. The man who wrote Vande Mataram was sympathetic to the British Raj and despised Muslims.…
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— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) May 7, 2026
वहीं इस पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन औवेसी का बयान आया है. औवेसी का कहना है कि धर्म और राष्ट्रवाद को आपस में नहीं मिलाना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने दावा किया है कि स्वतंत्रता आंदोलन के कई नेताओं जिनमें जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर और सुभाष चंद्र बोस ने भी पहले राष्ट्रीय स्तर के सरकारी कार्यक्रमों में इस गीत के इस्तेमाल पर आपत्ती उठाई है. उन्होंने यह भी बताया कि संविधान की प्रस्तावना की शुरूआत भारत माता से नहीं 'हम भारत के लोग' से होती है. ओवैसी ने आगे कहा कि संविधान हर नागरिक को विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, आस्था और उपासना की आजादी की गारंटी देता है.
इसके साथ ही ओवैसी ने संविधान सभा में हुई बहसों का भी हवाला दिया. उन्होंने कहा कि कुछ सदस्य चाहते थे कि संविधान की शुरूआत ईश्वर या किसी देवी के नाम से हो लेकिन उन सुझावों को खारिज कर दिया गया था.