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अनुप्रिया पटेल पर आया गुस्सा! सातवें चरण में कितना असर डालेंगे राजा भैया?

Raja bhaiya: बिना चुनाव में उतरे ही कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया इस बार चर्चा का विषय बने हुए हैं. कुछ दिनों पहले ही उन्होंने अपने समर्थकों से से कहा था कि वे जिसे चाहें उसे वोट डाल सकते हैं.

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लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में उत्तर प्रदेश की कुल 13 सीटों पर वोटिंग होनी है. इस बार कोई भी प्रत्याशी न लड़ाने वाले राजा भैया यानी रघुराज प्रताप सिंह अचानक से चर्चा में आ गए हैं. पहले प्रतापगढ़ और कौशांबी सीटों पर उनके असर को लेकर खूब चर्चाएं हुईं, अब उनकी चर्चाएं उत्तर प्रदेश के आखिर में बसे मिर्जापुर तक पहुंच गई हैं. इसकी वजह अपना दल (सोनेलाल) की नेता और मिर्जापुर से लोकसभा की प्रत्याशी अनुप्रिया पटेल का एक बयान है. अनुप्रिया पटेल ने प्रतापगढ़ में आयोजित एक रैली में राजा भैया को भरा-बुला कहा था जिसके बाद जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के कार्यकर्ता मिर्जापुर में सक्रिय हो गए हैं.

दरअसल, अनुप्रिया पटेल प्रतापगढ़ में NDA के समर्थन में एक रैली को संबोधित करने पहुंची थीं. इस रैली में उन्होंने बिना नाम लिए ही कहा, 'राजा अब रानी के पेट से पैदा नहीं होता है, राजा अब ईवीएम से ईवीएम के बटन से पैदा होता है.' इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए राजा भैया ने कहा था कि यह बयान गैरजरूरी है. उन्होंने यह भी कहा था, 'EVM से जनसेवक या जनप्रतिनिधि पैदा होते हैं, जिनकी उम्र सिर्फ पांच साल होती है.'

मिर्जापुर में सक्रिय हुई राजा भैया की टीम!

कहा जा रहा है कि राजा भैया और अनुप्रिया पटेल की इस जुबानी जंग के बाद सियासी पारा और गर्म हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतापगढ़ और कौशांबी में अप्रत्यक्ष रूप से सपा का समर्थन करने वाले राजा भैया ने मिर्जापुर में भी अपनी टीम को भेज दिया है. सूत्रों के मुताबिक, राजा भैया की टीम मिर्जापुर में भी सक्रिय हो गई है और वहां भी वह समाजवादी पार्टी के पक्ष में माहौल बना रही है, ताकि अनुप्रिया पटेल को हराया जा सके.

क्या है मिर्जापुर का गणित?

मिर्जापुर से लगातार दो बार से चुनाव जीत रहीं अनुप्रिया पटेल के सामने इस बार समाजवादी पार्टी के रमेश चंद बिंद हैं. पिछली बार दूसरे नंबर पर रही सपा को थोड़ी राहत इस बात से है कि ललितेश पति त्रिपाठी अब इंडिया गठबंधन में हैं और वह मिर्जापुर की बजाय भदोही से चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि, जातिगत समीकरण अभी भी अनुप्रिया के पक्ष में ही दिख रहा है. ऐसे में राजा भैया कितनी मुश्किलें बढ़ा पराएंगे यह देखने वाली बात होगी.

मिर्जापुर में लगभग 2.5 लाख पटेल, 1.95 लाख दलित, 1.6 लाख ब्राह्मण, 1 लाख मौर्य-कुशवाहा-सैनी, 1.29 लाख मुस्लिम, 1.40 लाख बिंद और 1.3 लाख वैश्य मतदाता हैं. यहां क्षत्रिय वोटबैंक बहुत कम संख्या में हैं. ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि राजा भैया के विरोध के चलते अनुप्रिया के पक्ष में कुर्मी वोट लामंबद हो सकता है.

सपा को कितनी है उम्मीद?

इस बार PDA के नारे के साथ उतरी सपा ने मिर्जापुर में बड़ा दांव खेला है. उसने बिंद जाति से आने वाले रमेश बिंद को चुनाव में उतारकर अपने पारंपरिक वोटबैंक के साथ-साथ दलितों का वोट भी खींचने की कोशिश की है. इसके अलावा, सपा को ललितेश पति त्रिपाठी से भी बहुत उम्मीदें हैं कि वह उसके लिए ब्राह्मण वोट लेकर आएंगे.