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India Daily

'रोकने-टोकने और निकाल बाहर करने का अधिकार', स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष पर बरसे अमित शाह

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर अमित शाह ने तीखा जवाब दिया. उन्होंने स्पीकर की गरिमा और संवैधानिक सुरक्षा का बचाव करते हुए सदन में अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया.

KanhaiyaaZee
'रोकने-टोकने और निकाल बाहर करने का अधिकार', स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष पर बरसे अमित शाह
Courtesy: X

नई दिल्ली: लोकसभा में आज राजनीतिक गरमागरमी के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने स्पीकर ओम बिरला के प्रति विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अपनी बात रखी. शाह ने स्पष्ट किया कि वे आज कोई राजनीतिक आरोप नहीं लगाएंगे बल्कि विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों का कड़ा जवाब देंगे. उन्होंने सदन की मर्यादा और नियमों की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि स्पीकर का पद अत्यंत निष्पक्ष और संवैधानिक सुरक्षा से लैस होता है जिस पर सवाल उठाना लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.

अमित शाह ने सदन में जोर देकर कहा कि स्पीकर के फैसले में सर्वोच्च न्यायालय भी हस्तक्षेप नहीं कर सकता है क्योंकि यह सुरक्षा उन्हें स्वयं संविधान ने प्रदान की है. स्पीकर का मुख्य कर्तव्य सदन की व्यवस्था बनाए रखना और सभी सदस्यों को बोलने का उचित मौका देना है. उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि सदन की गरिमा को ताक पर रखकर नियम तोड़े जा रहे हैं. शाह ने जोर दिया कि लोकतंत्र की साख आपसी विश्वास और शिष्टाचार पर टिकी होती है.
अनुशासन और सदन की गरिमा गृह मंत्री ने विपक्षी सदस्यों के आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियमों के अनुसार ही सदन चलना चाहिए. उन्होंने वेल में आकर कागज फाड़ने और उन्हें चेयर की तरफ फेंकने की घटनाओं की कड़ी निंदा की. शाह ने कहा कि ऐसे कृत्य स्पीकर को असहाय बनाने की कोशिश हैं जो कतई स्वीकार्य नहीं हैं. सदन की गंभीर अव्यवस्था के दौरान कार्यवाही को स्थगित करना स्पीकर का अधिकार और विवशता दोनों बन जाती है.

वरिष्ठ सदस्यों की जिम्मेदारी 

शाह ने विपक्षी दल के वरिष्ठ नेताओं जैसे शशि थरूर और टीआर बालू का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें अपने जूनियर साथियों को संसदीय मर्यादा सिखानी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ सदस्य अनुशासन सिखा दें तो सदन की आधी समस्याएं स्वयं समाप्त हो जाएंगी. नियमों को नजरअंदाज करने पर स्पीकर को चेतावनी देने, नामित करने या निष्कासित करने का पूर्ण अधिकार है. प्रधानमंत्री की चेयर के पास सदस्यों का एकत्रित होना भी नियमों के विरुद्ध है.

अविश्वास प्रस्ताव पर दुख 

अमित शाह ने कहा कि स्पीकर सभी के होते हैं और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना एक अत्यंत अफसोसजनक पल है. उन्होंने याद दिलाया कि जब ओम बिरला चुने गए थे, तब सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के नेता उन्हें सम्मानपूर्वक चेयर तक लेकर गए थे. उन्होंने सवाल उठाया कि अब उनकी निष्ठा पर संदेह क्यों किया जा रहा है? लोकतंत्र के इतिहास में नियमों का पालन करना हर सदस्य का पवित्र दायित्व होता है.

गृह मंत्री ने ऐतिहासिक तथ्यों को साझा करते हुए बताया कि अब तक केवल तीन बार ऐसे प्रस्ताव आए हैं. उन्होंने बताया कि 1954 में मावलंकर के खिलाफ, फिर सोशलिस्ट पार्टी और अब कांग्रेस यह प्रस्ताव लेकर आई है. शाह ने गर्व से कहा कि उनकी पार्टी विपक्ष में रहते हुए कभी स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव नहीं लाई. उन्होंने अंत में दोहराया कि स्पीकर की निष्ठा पर कभी भी शंका नहीं की जानी चाहिए.