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समान नागरिक संहिता पर  भड़के ओवैसी, UCC को हिंदू कोड बताया

Asaduddin Owaisi On UCC: AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने UCC पर एक के बाद एक कर कई सवाल उठाए हैं. ओवैसी से कहा है कि UCC सिर्फ और सिर्फ एक हिंदू कोड है इसके अलावा इसमें और कुछ नहीं है.

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Purushottam Kumar
Asaduddin Owaisi

Asaduddin Owaisi On UCC: उत्तराखंड विधानसभा में मंगलवार को मान नागरिक संहिता विधेयक पेस किया गया. इस विधेयक को पेश किए जाने के बाद से प्रतिक्रियाओं का दौरान जारी है. यूसीसी पर मुस्लिम संगठनों का कड़ा विरोध देखने को मिल रहा है. इस विधेयक पर  AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा है कि UCC एक हिंदू कोड है,  हिंदू कोड के अलावा यह और कुछ नहीं है.

'UCC Bill हिंदू कोड के अलावा कुछ नहीं'

UCC को लेकर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उत्तराखंड UCC Bill सभी के लिए लागू एक हिंदू कोड के अलावा और कुछ नहीं है. सबसे पहले, हिंदू अविभाजित परिवार को छुआ नहीं गया है. क्यों? यदि आप उत्तराधिकार और विरासत के लिए एक समान कानून चाहते हैं, तो हिंदुओं को इससे बाहर क्यों रखा गया है? क्या कोई कानून एक समान हो सकता है यदि वह आपके राज्य के अधिकांश हिस्सों पर लागू नहीं होता है? 

'उत्तराखंड की वित्तीय स्थिति खराब है'

असदुद्दीन ओवैसी ने लिखा कि द्विविवाह, हलाला, लिव-इन रिलेशनशिप चर्चा का विषय बन गए हैं. लेकिन कोई यह नहीं पूछ रहा कि हिंदू अविभाजित परिवार को क्यों बाहर रखा गया है. उन्होंने कहा कि कोई यह नहीं पूछ रहा कि इसकी जरूरत क्यों पड़ी. सीएम के मुताबिक बाढ़ से उनके राज्य को 1000 करोड़ का नुकसान हुआ है. 17000 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई और फसल के नुकसान का अनुमान 2 करोड़ से अधिक था. उत्तराखंड की वित्तीय स्थिति खराब है, इसलिए धामी को इसे पेश करने की जरूरत महसूस होती है. 

'आदिवासियों को बिल से बाहर क्यों रखा गया'

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इस बिल में कई अन्य संवैधानिक और कानूनी मुद्दे भी हैं. आदिवासियों को इस बिल से बाहर क्यों रखा गया है? यदि एक समुदाय को छूट दे दी जाए तो क्या यह एक समान हो सकता है? अगला सवाल मौलिक अधिकारों का है. मुझे अपने धर्म और संस्कृति का पालन करने का अधिकार है, यह विधेयक मुझे एक अलग धर्म और संस्कृति का पालन करने के लिए मजबूर करता है. हमारे धर्म में, विरासत और विवाह धार्मिक प्रथा का हिस्सा हैं, हमें एक अलग प्रणाली का पालन करने के लिए मजबूर करना अनुच्छेद 25 और 29 का उल्लंघन है.

ओवैसी ने आगे कहा कि यूसीसी को लेकर संवैधानिक मुद्दा है. मोदी सरकार ने SC में कहा कि UCC केवल संसद द्वारा अधिनियमित किया जा सकता है. यह विधेयक शरिया अधिनियम, हिंदू विवाह अधिनियम, एसएमए, आईएसए आदि जैसे केंद्रीय कानूनों का खंडन करता है. राष्ट्रपति की सहमति के बिना यह कानून कैसे काम करेगा? एसएमए, आईएसए, जेजेए, डीवीए आदि के रूप में एक स्वैच्छिक यूसीसी पहले से ही मौजूद है. जब अंबेडकर ने स्वयं इसे अनिवार्य नहीं कहा तो इसे अनिवार्य क्यों बनाया गया?