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India Daily

इंदौर के बाद गांधीनगर में दूषित पानी पीने से हाहाकार, 104 बच्चे बीमार

हालात इतने बिगड़ गए कि सिविल अस्पताल में बच्चों को भर्ती करने के लिए नया वार्ड तक खोलना पड़ा. डॉक्टरों के अनुसार, इनमें से करीब 50 प्रतिशत बच्चों में टाइफाइड की पुष्टि हुई है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
इंदौर के बाद गांधीनगर में दूषित पानी पीने से हाहाकार, 104 बच्चे बीमार
Courtesy: pinterest

इंदौर के बाद अब गुजरात की राजधानी गांधीनगर में भी दूषित पेयजल ने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है. पिछले तीन दिनों में गंदा पानी पीने से 104 बच्चे बीमार हो गए हैं. हालात इतने बिगड़ गए कि सिविल अस्पताल में बच्चों को भर्ती करने के लिए नया वार्ड तक खोलना पड़ा. डॉक्टरों के अनुसार, इनमें से करीब 50 प्रतिशत बच्चों में टाइफाइड की पुष्टि हुई है.

किन इलाकों में सबसे ज्यादा असर

प्रशासन की शुरुआती जांच में सामने आया है कि सेक्टर-24, सेक्टर-28 और आदिवाड़ा इलाके के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. यहां घरों में सप्लाई होने वाले पानी में सीवेज की गंदगी मिल रही थी. जब पानी की सप्लाई लाइन की जांच की गई तो शहर में कुल 10 जगहों पर लीकेज पाए गए.

नई पाइपलाइन में निकली खामी

हैरानी की बात यह है कि जिन पाइपलाइनों में लीकेज मिले हैं, वे स्मार्ट सिटी योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर बिछाई गई नई लाइनें हैं. इन लीकेज के कारण सीवेज का गंदा पानी पीने की लाइन में मिल गया, जिससे बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए.

स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, 40 टीमें तैनात

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कदम उठाए हैं. 40 स्वास्थ्य टीमें बनाई गई हैं, जिनमें 80 से ज्यादा कर्मचारी शामिल हैं. ये टीमें अब तक 38 हजार से अधिक आबादी वाले करीब 10 हजार घरों की जांच कर चुकी हैं. पानी में क्लोरीन मिलाने और लीकेज की मरम्मत का काम भी शुरू कर दिया गया है.

सरकार के बड़े अधिकारियों ने लिया संज्ञान

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने जिला कलेक्टर, नगर आयुक्त और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक की और सिविल अस्पताल का दौरा किया. उन्होंने बताया कि 22 डॉक्टरों की एक विशेष टीम बनाई गई है. वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर से फोन पर बातचीत की है.

बच्चों की हालत और अस्पताल की स्थिति

सिविल अस्पताल की अधीक्षक डॉ. मिताबेन पारिख ने बताया कि 1 से 16 साल तक के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. बच्चे तेज बुखार, पेट दर्द और उल्टी की शिकायत लेकर आ रहे हैं. फिलहाल 104 बच्चों का इलाज एफ2 और ई2 वार्ड में किया जा रहा है. मरीजों की संख्या बढ़ने पर नया वार्ड नंबर 604 शुरू करना पड़ा.

इंदौर की घटना ने बढ़ाई चिंता

गौरतलब है कि इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में भी दूषित पानी से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है. इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए अतिरिक्त पानी के टैंकर भेजने के आदेश दिए हैं. गांधीनगर की घटना ने एक बार फिर पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.