Aditya L1 enters critical stage: भारत का सूर्य मिशन आदित्य एल- 1 स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी और सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण संतुलन के बिंदु लैग्रेंज प्वाइंट एल-1 के नजदीक स्थित हैलो कक्षा में जटिल प्रवेश के लिए तैयार है. इसरो ने बताया कि स्पेसक्राफ्ट अपने तय लक्ष्य के नजदीक है. स्पेसक्राफ्ट का हैलो आर्बिट में पहुंचना मिशन की कामयाबी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. इसरो के मुताबिक, स्पेसक्राफ्ट अपने इस फेज की शुरुआत 6 जनवरी के आसपास करेगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, एल-1 में प्रवेश मिशन का एक महत्वपूर्ण चरण है, जिसके लिए सटीक नेविगेशन और नियंत्रण की आवश्यकता होती है. एल-1 की ओर हैलो आर्बिट में स्थापित होने से पहले आदित्य एल-1 को पृथ्वी से जुड़ी चार कक्षीय गतिविधियों की एक चेन से गुजरना होगा. इस पूरे प्रोसेस में स्पेसक्राफ्ट को हैलो आर्बिट में प्रवेश करने से पहले वेग और उसके पथ का ख्याल रखना बेहद अहम होगा.
हैलो आर्बिट में स्पेसक्राफ्ट प्रवेश करने में सफल रहे इसके लिए इसरो को काफी सावधानियां बरतनी होंगी. इसके तहत स्पेस एजेंसी को स्पेसक्राफ्ट की स्पीड और उसकी स्थिति की लगातार निगरानी करनी होगी. यान अपने तय रास्ते से भटकने न पाए इसके लिए ऑनबोर्ड थ्रस्टर्स का भी प्रयोग किया जाएगा.
आपको बता दें कि यह स्पेसक्राफ्ट अपनी यात्रा के अंतिम फेज में है. यह अंतरिक्ष के ठंडे निर्वात में 15 लाख किलोमीटर से अधिक विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है. इसरो ने 2 सितंबर, 2023 को श्रीहरिकोटा से अंतरिक्ष यान लॉन्च किया था.इस मिशन का उद्देश्य सूर्य का अध्ययन करना है. साथ ही सूर्य से मिलने वाले प्रकाश और ऊर्जा समेत कई गतिशील परिवर्तन और विस्फोटक घटनाओं की जानकारी जुटाना है.