महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दिपके ने सरकार पर निशाना साधा है. लातूर जिले के औसा तहसील स्थित उजानी गांव के जिला परिषद स्कूल का दौरा करने के बाद उन्होंने शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग की. दिपके ने कहा कि कई सरकारी स्कूलों में बच्चों को आज भी बुनियादी सुविधाओं के बिना पढ़ाई करनी पड़ रही है.
दिपके ने आरोप लगाया कि राज्य के कई स्कूलों में पर्याप्त कक्षाएं, बेंच, शौचालय और सुरक्षित पहुंच मार्ग तक उपलब्ध नहीं हैं. उन्होंने कहा कि बच्चों को खराब और असुरक्षित परिस्थितियों में पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. उनके मुताबिक, कुछ स्कूलों की स्थिति इतनी खराब है कि वहां विद्यार्थियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देने की अपील की.
CJP नेता ने कहा कि मंत्रियों और विधायकों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चाहिए, तभी वे वहां की वास्तविक समस्याओं को समझ पाएंगे. उन्होंने जनता से भी अपील की कि किसी भी राजनीतिक दल के नेता जब गांव में वोट मांगने आएं तो उनसे पहले स्कूलों की स्थिति सुधारने की मांग की जाए. दिपके ने कहा कि शिक्षा को लेकर जनदबाव बढ़ाना जरूरी है.
शिक्षा मंत्री दादा भुसे के पद पर बने रहने को लेकर सवाल पूछे जाने पर दिपके ने कहा कि मौजूदा हालात उन्हें मंत्री के इस्तीफे की मांग करने के लिए मजबूर करते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद सरकारी स्कूलों की बुनियादी समस्याएं दूर नहीं की गईं. उन्होंने टपकती छतों, पर्याप्त बेंच की कमी और जर्जर सुविधाओं का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा.
दिपके ने स्कूल परिसरों में कथित तौर पर सांप के काटने से बच्चों की मौत की खबरों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कुछ स्कूलों के पीछे जमा कचरा और कबाड़ सांपों के लिए अनुकूल स्थिति पैदा कर सकता है. उनके अनुसार, सुरक्षित रास्ते और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने दावा किया कि CJP के निरीक्षण के बाद कुछ स्कूलों में प्रशासन ने काम शुरू भी किया है.
दिपके ने अपने ‘School Thik Karo’ अभियान के जरिए सरकारी स्कूलों की समस्याओं को उठाने की बात कही. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोगों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है और ज्यादा संगठन व जनआंदोलन सामने आने चाहिए. Gen Z को लेकर उन्होंने कहा कि 2029 के चुनाव तक युवा एक बड़ा मतदाता वर्ग बनेंगे और राजनीतिक दलों को उनके मुद्दों पर ध्यान देना होगा. उन्होंने चेतावनी दी कि स्कूलों की स्थिति नहीं सुधरी तो गांव-गांव विरोध बढ़ सकता है.
लातूर में NEET पेपर लीक मामले की CBI जांच पर भी दिपके ने सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई छोटे स्तर के आरोपियों तक सीमित दिखाई देती है, जबकि बड़े लोगों को बचाया जा रहा है. दिपके ने कहा कि इतने बड़े मामले में व्यवस्था के वरिष्ठ लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए और केवल कुछ गिरफ्तारियों को पर्याप्त कार्रवाई नहीं माना जा सकता.