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पसंदीदा पीएम की रेस में केजरीवाल से आगे निकले अभिजीत दिपके, एक्स बॉस को पीछे छोड़ा: MOTN सर्वे

MOTN सर्वे में CJP संस्थापक अभिजीत दिपके प्रधानमंत्री पद की पसंद में 1.3 प्रतिशत के साथ अरविंद केजरीवाल से मामूली अंतर से आगे निकल गए.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
पसंदीदा पीएम की रेस में केजरीवाल से आगे निकले अभिजीत दिपके, एक्स बॉस को पीछे छोड़ा: MOTN सर्वे
Courtesy: ANI

राजनीति में समीकरण कितनी तेजी से बदल सकते हैं, इसका दिलचस्प उदाहरण अभिजीत दिपके के रूप में सामने आया है. India Today-CVoter के Mood of the Nation सर्वे में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक दिपके ने प्रधानमंत्री पद की पसंद के मामले में अपने पूर्व बॉस और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल को पीछे छोड़ दिया है. दिपके को 1.3 प्रतिशत लोगों ने अगला प्रधानमंत्री बनने के लिए उपयुक्त माना, जबकि केजरीवाल को 1.2 प्रतिशत समर्थन मिला. अंतर सिर्फ 0.1 प्रतिशत का है, लेकिन दिपके के राजनीतिक सफर को देखते हुए यह आंकड़ा खासा चर्चा में है.

मोदी सबसे आगे, राहुल दूसरे और विजय तीसरे नंबर पर

अगस्त 2026 के MOTN सर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 48.7 प्रतिशत समर्थन के साथ सबसे आगे रहे. कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 27.1 प्रतिशत और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को 9.2 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया. इसके बाद ममता बनर्जी 2 प्रतिशत और अखिलेश यादव 1.7 प्रतिशत पर रहे. इसी सूची में दिपके 1.3 प्रतिशत के साथ छठे स्थान पर पहुंचे और केजरीवाल 1.2 प्रतिशत के साथ उनके ठीक पीछे रहे. सर्वे के लिए 1 जुलाई से 25 अगस्त के बीच 25,184 लोगों से सीधे बातचीत की गई, जबकि पिछले छह महीनों के 91,795 ट्रैकिंग इंटरव्यू भी आंकड़ों में शामिल किए गए.

विपक्षी नेतृत्व में भी केजरीवाल को झटका

प्रधानमंत्री पद के अलावा विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व करने की पसंद में भी केजरीवाल पीछे दिखाई दिए. राहुल गांधी 29 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर रहे, जबकि विजय ने 12.2 प्रतिशत के साथ दूसरी जगह बनाई. ममता बनर्जी 8.5 प्रतिशत और केजरीवाल 7.5 प्रतिशत पर रहे. यानी जिस राजनीतिक चेहरे ने कभी दिल्ली की राजनीति से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई थी, उसकी लोकप्रियता इन आंकड़ों में नए चेहरों के सामने दबाव में दिखाई देती है.

CJI की टिप्पणी से शुरू हुई दिपके की नई पहचान

दिपके की मौजूदा पहचान हालांकि किसी पारंपरिक चुनावी राजनीति से नहीं, बल्कि युवाओं के मुद्दों से बने आंदोलन से हुई. CJI की ओर से बेरोजगार युवाओं को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के बाद उन्होंने मई में व्यंग्यात्मक अंदाज में कॉकरोच जनता पार्टी बनाई. सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह प्रयोग धीरे-धीरे युवाओं की नाराजगी से जुड़े अभियान में बदल गया. इसके बाद CJP ने NEET-UG 2026 पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को प्रमुख मुद्दा बनाया.

45 दिन के आंदोलन ने बढ़ाया कद

6 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ CJP का आंदोलन 45 दिनों तक चला. आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा जुड़े और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी 26 दिन का उपवास किया. 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त हुआ. इसके बाद CJP ने खुद को एक दबाव समूह के रूप में आगे बढ़ाया और 15 अगस्त से ‘School Thik Karo’ अभियान शुरू किया, जिसमें सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधारने और उनके ऑडिट की मांग उठाई जा रही है.

AAP कनेक्शन पर उठते रहे सवाल

दिपके का अतीत भी इस पूरी कहानी को दिलचस्प बनाता है. वह 2020 से 2023 के बीच AAP की कम्युनिकेशन टीम से जुड़े रहे थे. इसी वजह से बीजेपी नेताओं ने CJP को AAP से जोड़ने के आरोप लगाए. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे समेत कई नेताओं ने दिपके की भूमिका और संगठन के संबंधों पर सवाल उठाए हैं. ऐसे आरोपों के बीच MOTN का यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि कभी केजरीवाल के साथ काम कर चुके दिपके अब उसी सर्वे में प्रधानमंत्री पद की पसंद में उनसे मामूली ही सही, लेकिन आगे दिखाई दे रहे हैं.