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1993 Mumbai Blasts Case: 40 से अधिक धमाकों को दिया था अंजाम, अब TADA कोर्ट ने मुख्य आरोपी अब्दुल करीम टुंडा को किया बरी

1993 Mumbai Blasts Case: टाडा कोर्ट ने 1993 मुंबई ब्लास्ट के मुख्य आरोपी अब्दुल करीब टुंडा को बरा कर दिया है. टाडा अदालत ने इस मामले में दो अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया गया है, जिन्हें जल्द ही सजा सुनाई जाएगी.

India Daily Live

1993 Mumbai Blasts Case: टाडा कोर्ट ने 1993 में हुए सिलसिलेवार बम धमाके मामले के मुख्य आरोपी आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को बरी कर दिया है. कोर्ट ने आज यानी गुरुवार को इस मामले में दो अन्य आरोपियों को कथित तौर पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. सैयद अब्दुल करीम उर्फ ​​टुंडा पर बांग्लादेश भागने से पहले 1993 में भारत में 40 से अधिक बम विस्फोटों की साजिश रचने का आरोप था. ऐसा माना जाता है कि पाकिस्तानी आतंकी समूहों ने टुंडा को विस्फोटक उपलब्ध कराए थे. 

2013 में आतंकी टुंडा को भारत-नेपाल सीमा के बनबसा इलाके से गिरफ्तार किया गया था. इससे पहले भी कई बम विस्फोटों का आरोप होने के बावजूद टुंडा को 2016 में उसके खिलाफ चार मामलों में दिल्ली कोर्ट से क्लीन चिट मिली थी. उस समय अदालत ने कहा था कि दिल्ली पुलिस आरोप तय करने के लिए उनके खिलाफ महत्वपूर्ण सबूत लाने में विफल रही है. 

फिलहाल जेल में ही रहेगा आतंकी टुंडा

2017 में अदालत ने 1996 के सोनीपत बम विस्फोट मामले में आतंकी टुंडा की संलिप्ता के लिए टुंडा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी और 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया. तब से टुंडा जेल में सजा काट रहा है. 

आज टाडा कोर्ट से बरी किए जाने के बाद न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए उसके वकील शफकत सुल्तानी ने कहा कि अब्दुल करीम टुंडा निर्दोष है, आज कोर्ट ने यह फैसला सुनाया. अब्दुल करीम टुंडा को सभी धाराओं और सभी अधिनियमों से बरी कर दिया गया है.

टुंडा को क्या किया गया बरी?

टुंडा के वकील ने बताया कि सीबीआई मामले में टाडा, IPC, रेलवे एक्ट, आर्म्स एक्ट समेत अन्य एक्ट में टाडा कोर्ट के सामने कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका, इसलिए उन्हें बरी कर दिया गया. वकील ने ये भी बताया कि मामले में इरफान और हमीदुद्दीन दोषी ठहराया गया है और जल्द ही सजा सुनाई जाएगी.

1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस की पहली बरसी पर कई ट्रेनों में धमाके हुए थे, जिनमें 2 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे. ये धमाके कोटा, कानपुर, सिकंदराबाद और सूरत से गुजरने वाली ट्रेनों में हुए थे. बंबई बम धमाकों के कुछ ही महीनों बाद ट्रेन बम धमाकों ने देश को झकझोर कर रख दिया था. दूर-दराज के शहरों के सभी मामलों को एक साथ जोड़ दिया गया और टाडा एक्ट के तहत एक स्पेशल कोर्ट की ओर से सुनवाई की गई. मामले की जांच की कमान केंद्रीय एजेंसी सीबीआई के हाथ में थी.

80 साल के अब्दुल करीम टुंडा को आतंकी दाऊद इब्राहिम का करीबी माना जाता है. टुंडा को अलग-अलग बम बनाने में महारत हासिल है, जिसके चलते उसे 'डॉक्टर बम' के नाम से भी जाना जाता है. टुंडा ने 40 साल की उम्र तक बढ़ई का काम करता था. इसी दौरान वो दहशतगर्दों के संपर्क में आया और आतंक की दुनिया में कदम रखा. 1993 में मुंबई में हुए धमाकों के बाद पहली बार उसका नाम सामने आया. एक बार बम बनाते समय हुए उसके बाएं हाथ में धमाका हो गया था, जिसके बाद उसका हाथ काटना पड़ा था.