उत्तर भारत में मौसम ले रहा करवट, इन राज्यों में बारिश और बर्फबारी की संभावना; जानें वेदर अपडेट
पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर भारत में बारिश, बर्फबारी, ओले गिरने और घना कोहरा छाने की उम्मीद है. पहाड़ी और मैदानी दोनों इलाकों में मौसम बदलेगा जिसकी वजह से ठंड बढ़ सकती है.
नई दिल्ली: उत्तर भारत के मौसम में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा क्योंकि एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ बारिश और बर्फबारी के साथ आएगा. भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने पुष्टि की है कि लगातार दो ऐसे सिस्टम के प्रभाव से 31 जनवरी से 3 फरवरी तक पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में हल्की से मध्यम, छिटपुट बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है.
मौसम विभाग के जानकार द्वारा बताया गया कि पंजाब, हरियाणा और यहां तक कि बिहार के कुछ हिस्सों में भी बर्फबारी या बारिश की संभावना है. राजधानी के लिए IMD ने 31 जनवरी को आमतौर पर बादल छाए रहने वाले आसमान की भविष्यवाणी की है. जिसमें रात के समय गरज और तेज हवाओं के साथ बहुत हल्की बारिश की संभावना है.
राजस्थान में कैसी होगी स्थिति?
इस बीच, राजस्थान के लिए अलग-अलग जगहों पर ओलावृष्टि एक बड़ी चिंता का विषय है, जिसमें 31 जनवरी को पश्चिम राजस्थान और 1 फरवरी तक पूर्वी राजस्थान के लिए चेतावनी जारी की गई है.
कोहरा कितना गंभीर होगा?
बारिश आने के बावजूद भी घना कोहरा यात्रियों के लिए एक बड़ी बाधा बना हुआ है. IMD ने चेतावनी दी है कि 31 जनवरी की सुबह तक उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में घना से बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना है. इसी दौरान हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में भी इसी तरह का घना कोहरा छाए रहने की उम्मीद है.
जबकि अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा, लेकिन अगले तीन दिनों में इसमें धीरे-धीरे तीन से पांच डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है.
पहाड़ी क्षेत्रों में कैसी होगी स्थिति?
IMD की ओर से भविष्यवाणी करते हुए बताया गया कि इन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गरज और बिजली के साथ बारिश होने की संभावना है. इस अवधि के दौरान जम्मू, कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी उम्मीद है. यह नमी इस क्षेत्र के लिए राहत देगी, जो अपने स्नोपैक को फिर से भरने के लिए एक उचित सर्दियों के मौसम का इंतजार कर रहा था. इन विक्षोभों का प्रभाव पहाड़ की चोटियों से काफी आगे उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों तक फैलेगा.