बंगाल में मिली करारी हार के बाद ख़त्म होने की कगार पर TMC! एक साथ 91 पार्षदों ने दिया इस्तीफा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में भारी बिखराव शुरू हो गया है. पार्टी के 91 स्थानीय पार्षदों ने एक साथ सामूहिक इस्तीफा दे दिया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने अब तक का सबसे बड़ा और गंभीर राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है. हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद पार्टी के भीतर जबरदस्त बगावत हो गई है. राज्य के अलग-अलग जिलों से टीएमसी के 91 स्थानीय पार्षदों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया है. इस घटनाक्रम से सियासी हलचल मच गई है.

पश्चिम बंगाल भाजपा महिला मोर्चा की सोशल मीडिया प्रभारी लक्ष्मी सिंह ने इस सामूहिक इस्तीफे को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक बड़ा खुलासा किया है. लक्ष्मी सिंह ने अपनी पोस्ट में साफ तौर पर लिखा कि तृणमूल कांग्रेस के 91 पार्षदों का यह इस्तीफा पार्टी की अंदरूनी टूट को साफ दर्शाता है. विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद से ही टीएमसी का पूरा शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय संगठन एक बेहद गंभीर राजनीतिक संकट से लगातार जूझ रहा है.

नई सरकार के वित्तीय ऑडिट से पार्षदों में खौफ!

भाजपा नेता लक्ष्मी सिंह के मुताबिक, राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली नई सरकार के सत्ता संभालते ही सभी नगर निकायों में पिछले वर्षों के वित्तीय कामकाज की गहन जांच और ऑडिट के आदेश दे दिए गए हैं. इस सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और भ्रष्टाचार विरोधी जांच के डर से ही टीएमसी के स्थानीय पार्षद और नगर पालिकाओं के अध्यक्ष आनन-फानन में अपने पद छोड़ रहे हैं. इनमें से कई नेता अब अपने बचाव के लिए तेजी से पाला बदलने की होड़ में लग गए हैं.

करोड़ों रुपये के घोटालों की खुलेगी पोल

दरअसल, नई सरकार के गठन के साथ ही पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार के कार्यकाल के दौरान नगर निकायों में हुई भारी वित्तीय अनियमितताओं की जांच को बहुत तेज कर दिया गया है. विभिन्न अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों के हाथ कई नगर पालिकाओं में हुए करोड़ों रुपये के विकास फंड घोटाले, चहेते ठेकेदारों को अवैध तरीके से टेंडर आवंटन और फर्जी बिलों के जरिए सरकारी खजाना लूटने के पुख्ता सबूत मिलने वाले हैं. इसी डर से स्थानीय स्तर पर खलबली मची है.

इस भारी-भरकम सामूहिक इस्तीफे के कारण पश्चिम बंगाल के कई महत्वपूर्ण नगर निगमों और पालिकाओं में पूरी प्रशासनिक व्यवस्था अचानक चरमरा गई है. जिन स्थानीय निकायों में टीएमसी के पास पूर्ण बहुमत था, वहां अब सदन पूरी तरह से बिना नेता के हो गए हैं. कई नगर पालिकाओं में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद भी रातों-रात खाली हो गए हैं. इस प्रशासनिक शून्यता के कारण शहरों में सफाई, पेयजल आपूर्ति और सड़क निर्माण जैसे जरूरी नागरिक विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं.