8वें वेतन आयोग पर बड़ा अपडेट, करोड़ों कर्मचारियों की सैलरी में होगा बंपर इजाफा; लेकिन ये लोग रह जाएंगे खाली हाथ!
8वें वेतन आयोग को लेकर 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों के बीच सुगबुगाहट तेज है. फिटमेंट फैक्टर में संभावित बदलाव से वेतन बढ़ने की उम्मीद तो है, लेकिन संविदा और पीएसयू कर्मियों के लिए स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है.
नई दिल्ली: देश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों 8वें वेतन आयोग के गठन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगी यह जानने को बेताब हैं कि उनके वेतन और फिटमेंट फैक्टर में कितनी बढ़ोतरी होगी. हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों में उत्साह के साथ-साथ एक अनिश्चितता और असमंजस का माहौल भी बना हुआ है. हर कोई अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद लगाए बैठा है.
यह समझना महत्वपूर्ण है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें केवल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए ही मान्य होती हैं. राज्य सरकार के कर्मचारियों पर ये बदलाव स्वतः लागू नहीं होते. यह पूरी तरह से संबंधित राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर करता है कि वह इन सिफारिशों को अपनाती है या नहीं. इसलिए, राज्यों के कर्मचारियों के लिए केंद्र के समान वेतन वृद्धि की गारंटी देना मुश्किल है, जिससे लाभ पाने वाले वर्गों में एक स्पष्ट विभाजन दिखाई देता है.
इन श्रेणियों को लग सकता है झटका
वेतन आयोग का लाभ सभी श्रेणियों के कर्मचारियों को समान रूप से नहीं मिलता है. विशेष रूप से, कॉन्ट्रैक्ट (संविदा) या एड-हॉक आधार पर काम करने वाले कर्मचारी केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के दायरे से बाहर होते हैं, जिससे उन्हें इस बढ़ोतरी का सीधा फायदा नहीं मिल पाएगा. इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के कर्मचारियों का अपना अलग वेतन ढांचा होता है. जब तक संबंधित पीएसयू आधिकारिक तौर पर आयोग की सिफारिशों को स्वीकार नहीं करता, तब तक वहां कार्यरत कर्मियों को इंतजार ही करना होगा.
करोड़ों लोगों की निगाहें सरकारी फैसले पर
वर्तमान में देश के लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख से अधिक पेंशनभोगी इस महत्वपूर्ण घोषणा की प्रतीक्षा कर रहे हैं. यदि सरकार आयोग के गठन और इसकी सिफारिशों को मंजूरी देती है, तो न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर में ऐतिहासिक वृद्धि की संभावना है. फिलहाल, सभी भत्ते और वेतन सातवें वेतन आयोग के पुराने नियमों के आधार पर ही दिए जा रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि नया आयोग आने से आमदनी में सुधार तो होगा, लेकिन सरकारी मुहर लगने तक यह केवल चर्चाओं तक सीमित है.
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