अगर आपकी उम्र भी है 20 से 30 साल तो करवा लीजिए ये 12 जरूरी टेस्ट, इनकी अनदेखी पड़ सकती है महंगी
20 से 30 साल के युवाओं को कुछ जरूरी मेडिकल टेस्ट कराने की सलाह दी गई है. इस उम्र में गलत खान-पान और सुस्त जीवनशैली से कई बीमारियां चुपके से बढ़ रही हैं. समय पर बेसिक जांच से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को रोका जा सकता है. पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए अलग-अलग टेस्ट बताए गए हैं.
आज की तेज रफ्तार वाली जिंदगी, काम का दबाव और खराब खान-पान की आदतों ने युवाओं में बीमारियों का खतरा काफी बढ़ा दिया है. 20 से 30 साल के अधिकांश युवा खुद को पूरी तरह फिट मानते हैं, लेकिन कई गंभीर बीमारियां बिना कोई लक्षण दिखाए शरीर में धीरे-धीरे बढ़ रही होती हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर कुछ बुनियादी टेस्ट करा लेना बहुत जरूरी है. ये टेस्ट न सिर्फ भविष्य की बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को रोकते हैं बल्कि लंबा और स्वस्थ जीवन जीने में भी मदद करते हैं. प्रिवेंटिव चेकअप को अब गंभीरता से लेना चाहिए.
पुरुषों के लिए 6 महत्वपूर्ण टेस्ट
20 से 30 साल के पुरुषों को सबसे पहले लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना चाहिए, जिसमें कोलेस्ट्रॉल लेवल की जांच होती है. आजकल कम उम्र में हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं, इसलिए यह टेस्ट बहुत जरूरी है. ब्लड शुगर यानी HbA1c टेस्ट पिछले तीन महीनों का औसत शुगर लेवल बताता है. खराब खान-पान की वजह से युवाओं में टाइप-2 डायबिटीज तेजी से फैल रही है.
लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) बाहर का खाना और शराब से लिवर को होने वाले नुकसान को पकड़ता है. ब्लड प्रेशर की नियमित जांच से हाई बीपी जैसे साइलेंट किलर को नियंत्रित किया जा सकता है. विटामिन D और B12 की जांच भी जरूरी है क्योंकि ऑफिस की नौकरी और धूप की कमी से इनकी कमी आम हो गई है. किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) भविष्य में किडनी फेलियर जैसी समस्या से बचाता है.
महिलाओं के लिए 6 महत्वपूर्ण टेस्ट
महिलाओं को थायराइड प्रोफाइल (TSH) टेस्ट जरूर कराना चाहिए क्योंकि हार्मोनल असंतुलन और वजन बढ़ना आम समस्या है. आयरन और हीमोग्लोबिन (CBC) की जांच से एनीमिया का पता चलता है, जो भारतीय महिलाओं में बहुत फैला हुआ है. 25 साल की उम्र के बाद पेप स्मियर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती जांच के लिए जरूरी है. पेल्विक अल्ट्रासाउंड PCOD और PCOS जैसी समस्याओं को समय पर पकड़ता है. बोन डेंसिटी टेस्ट हड्डियों की कमजोरी का शुरुआती संकेत देता है. ब्लड शुगर और इंसुलिन लेवल की जांच हार्मोनल बदलावों से होने वाली डायबिटीज और पीसीओडी को रोकने में मदद करती है.
इन उम्र में जांच क्यों जरूरी
20 से 30 साल की उम्र करियर बनाने और भविष्य संवारने का सबसे व्यस्त समय होता है. इसी दौरान अगर सेहत की अनदेखी की गई तो बाद में पछतावा बहुत महंगा पड़ सकता है. छोटे-छोटे लक्षणों को नजरअंदाज करना आगे चलकर बड़ी मेडिकल इमरजेंसी बन सकता है. समय पर किए गए ये प्रिवेंटिव टेस्ट बीमारियों को शुरुआती स्टेज पर पकड़ लेते हैं और इलाज आसान हो जाता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इन टेस्ट को अपनी रूटीन में शामिल करना चाहिए.
सावधानी से बचाएं सेहत
विश्व स्वास्थ्य दिवस हमें याद दिलाता है कि सेहत की देखभाल हमारी अपनी जिम्मेदारी है. 20 से 30 साल के युवा अगर इन बुनियादी टेस्ट को नियमित रूप से कराते रहें तो भविष्य में होने वाली महंगी और दर्दनाक बीमारियों से बच सकते हैं. परिवार के साथ मिलकर ये जांच कराना और डॉक्टर की सलाह मानना सबसे सही तरीका है. स्वस्थ शरीर ही हर सफलता की असली नींव है.
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