तोंद को मत समझिए मामूली! पेट की चर्बी बन सकती है डायबिटीज का बड़ा कारण
पेट की चर्बी सिर्फ दिखने की समस्या नहीं, बल्कि शरीर का संकेत है. यह इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज और हार्ट रोग का खतरा बढ़ाती है, लेकिन सही लाइफस्टाइल से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है.
आजकल डॉक्टर एक नए शब्द 'डायबेसिटी' पर जोर दे रहे हैं, जो मोटापा और डायबिटीज के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है. अक्सर लोग पेट की चर्बी को हल्के में लेते हैं, लेकिन यह शरीर की एक गंभीर चेतावनी हो सकती है. खासकर पेट के आसपास जमा होने वाला फैट शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है और कई बीमारियों की शुरुआत का कारण बन सकता है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि कब यह सामान्य है और कब खतरे का संकेत.
डायबेसिटी क्या है?
डायबेसिटी मोटापा और डायबिटीज का मिला-जुला रूप है. जब शरीर में ज्यादा फैट जमा होता है और साथ ही मेटाबॉलिक गड़बड़ी शुरू होती है, तो यह स्थिति बनती है. हर मोटा व्यक्ति डायबिटिक नहीं होता, लेकिन पेट के आसपास जमा चर्बी वाले लोगों में खतरा अधिक होता है. यह स्थिति धीरे-धीरे शरीर के अंगों को प्रभावित करती है और समय रहते ध्यान न दिया जाए तो गंभीर रूप ले सकती है.
किस तरह का मोटापा खतरनाक?
सभी तरह का मोटापा एक जैसा नहीं होता. शरीर में जमा फैट दो प्रकार का होता है- सबक्यूटेनियस और विसरल फैट. विसरल फैट, जो पेट के अंदर अंगों के आसपास जमा होता है, ज्यादा खतरनाक होता है. यह सूजन बढ़ाता है और इंसुलिन के काम को प्रभावित करता है. ऐसे लोग बाहर से सामान्य दिख सकते हैं, लेकिन अंदरूनी रूप से मेटाबॉलिक समस्याओं से जूझ रहे होते हैं.
पेट की चर्बी क्यों बढ़ाती है खतरा?
पेट के आसपास फैट जमा होने से लिवर और पैंक्रियाज पर असर पड़ता है. इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा होता है, यानी शरीर इंसुलिन को सही से इस्तेमाल नहीं कर पाता. इसका परिणाम ब्लड शुगर बढ़ना, कोलेस्ट्रॉल असंतुलन और हाई ब्लड प्रेशर के रूप में सामने आता है. यही स्थिति आगे चलकर हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है.
बिना लक्षण भी हो सकता है खतरा
डायबेसिटी की शुरुआत में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते. जब तक व्यक्ति को प्यास ज्यादा लगना, बार-बार पेशाब आना या थकान जैसे संकेत मिलते हैं, तब तक स्थिति काफी आगे बढ़ चुकी होती है. इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी है. खासकर जिनका वजन ज्यादा है, उन्हें समय-समय पर ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल की जांच करानी चाहिए.
बचाव और सही लाइफस्टाइल
पेट की चर्बी कम करने के लिए संतुलित डाइट और नियमित एक्सरसाइज जरूरी है. क्रैश डाइट से बचना चाहिए, क्योंकि इससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है। रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और तनाव कम करना जरूरी है. साथ ही, प्रोटीन का सेवन बढ़ाना और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना भी मददगार होता है. सही आदतों से डायबेसिटी के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है.