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'हरि ओम हरि' और 'रंबा हो' से छाईं ऊषा उत्थुप, 9 साल की उम्र में शुरू किया गाना; आज उनके जन्मदिन पर जानें दिलचस्प कहानी

दिग्गज गायिका ऊषा उत्थुप 8 नवंबर को अपना 79वां जन्मदिन मना रही हैं. उनका जन्म 8 नवंबर 1947 को चेन्नई में हुआ था. उन्होंने महज 9 साल की उम्र में रेडियो सीलोन के कार्यक्रम से गाना शुरू किया था.

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Km Jaya

Usha Uthup Birthday: भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका ऊषा उत्थुप आज 8 नवंबर को अपना 79वां जन्मदिन मना रही हैं. अपनी भारी और दमदार आवाज, अलग अंदाज और शानदार स्टेज परफॉर्मेंस के लिए मशहूर ऊषा उत्थुप ने संगीत की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. 

उन्होंने हिंदी के अलावा कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में गाने गाए हैं. दिलचस्प बात यह है कि जिस आवाज ने उन्हें दुनियाभर में पहचान दिलाई, उसी आवाज को कभी स्कूल में सिंगिंग के लिए उपयुक्त नहीं माना गया था. हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और महज 9 साल की उम्र में अपने संगीत के सफर की शुरुआत कर दी थी.

9 साल की उम्र में शुरू किया था गाना

ऊषा उत्थुप का जन्म 8 नवंबर 1947 को तमिलनाडु के चेन्नई में हुआ था. उनके पिता क्राइम ब्रांच में नौकरी करते थे. बचपन से ही ऊषा को संगीत और गायकी में दिलचस्पी थी. एक बार उन्होंने स्कूल में अपनी टीचर के सामने संगीत सीखने की इच्छा जाहिर की थी. लेकिन उनकी आवाज सुनने के बाद टीचर ने कह दिया कि उनकी आवाज गायकी के लिए सही नहीं है.


इस बात से निराश होने के बजाय ऊषा ने अपने जुनून को आगे बढ़ाया. उन्होंने महज 9 साल की उम्र में रेडियो सीलोन के लोकप्रिय कार्यक्रम 'ओवाल्टिन म्यूजिक ऑवर' के जरिए गाना शुरू किया. यहीं से उनके संगीत के सफर को नई दिशा मिली. आगे चलकर उनकी यही अलग आवाज उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई.

नाइट क्लब से शुरू हुआ बॉलीवुड का सफर

ऊषा उत्थुप ने अपने करियर की शुरुआत नाइट क्लब में गाना गाकर की थी. वह अलग-अलग शहरों में लाइव परफॉर्मेंस दिया करती थीं. इसी दौरान एक बार वह दिल्ली के एक नाइट क्लब में गाना गा रही थीं. वहां नवकेतन फिल्म्स की टीम के कुछ लोग भी मौजूद थे. उन्हें ऊषा की आवाज और गाने का अंदाज काफी पसंद आया.

इसके बाद फिल्ममेकर्स ने उनसे संपर्क किया और बॉलीवुड में गाने का मौका दिया. इस तरह ऊषा उत्थुप को हिंदी सिनेमा में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला. साल 1970 में फिल्म 'बॉम्बे टॉकीज' के अंग्रेजी गाने 'गुड टाइम्स एंड बैड टाइम्स' से उन्होंने बॉलीवुड में शुरुआत की. इसके बाद साल 1971 में देव आनंद की फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' में उनका गाया गाना 'हरे कृष्णा हरे राम' काफी लोकप्रिय हुआ. इस गाने ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई.

इन सुपरहिट गानों से मिली खास पहचान

ऊषा उत्थुप ने अपने करियर में कई ऐसे गाने गाए, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच पसंद किए जाते हैं. उनकी आवाज में एक अलग ऊर्जा और आकर्षण है. यही वजह है कि उनके गाने आज भी पार्टियों से लेकर म्यूजिक कार्यक्रमों तक सुनाई देते हैं.

उनके लोकप्रिय गानों में 'हरि ओम हरि', 'कोई यहां आहा नाचे नाचे', 'रंबा हो', 'एक दो च च च' और 'दोस्तों से प्यार किया, दुश्मनों से बदला लिया... जो भी किया हमने किया शान से' जैसे गाने शामिल हैं. इसके अलावा फिल्म 'सात खून माफ' का गाना 'डार्लिंग' भी काफी लोकप्रिय हुआ था. इन गानों ने ऊषा उत्थुप को बॉलीवुड की सबसे अलग आवाज वाली गायिकाओं में शामिल कर दिया.

कई भाषाओं में गाकर बनाया रिकॉर्ड

ऊषा उत्थुप की खासियत सिर्फ उनकी आवाज ही नहीं, बल्कि अलग-अलग भाषाओं में गाने की क्षमता भी है. उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी के अलावा तमिल, मराठी, गुजराती, पंजाबी, बंगाली और असमिया जैसी भारतीय भाषाओं में गाने गाए हैं. वहीं जर्मन, रूसी, इटालियन और फ्रेंच जैसी विदेशी भाषाओं में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा है.

दशकों लंबे करियर में ऊषा उत्थुप ने अपनी अलग गायकी और आत्मविश्वास से संगीत की दुनिया में खास मुकाम हासिल किया है. उनकी कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जिन्हें कभी अपनी प्रतिभा पर संदेह करने के लिए कहा गया हो. स्कूल में जिस आवाज को गायकी के लायक नहीं समझा गया, उसी आवाज ने उन्हें देश की लोकप्रिय गायिकाओं में शामिल कर दिया.