‘न मजाकिया, न समझदारी भरा’..., कबाब-कोरमा वाले बयान पर घिरीं ट्विंकल खन्ना; सोशल मीडिया पर मचा बवाल
ट्विंकल खन्ना का हालिया कॉलम सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. खाने की सुरक्षा और इतिहास से जुड़े विवाद पर लिखते हुए उन्होंने मुगलों का जिक्र कबाब, कोरमा और मुगलई व्यंजनों के संदर्भ में किया.
एक्ट्रेस और लेखिका ट्विंकल खन्ना का हालिया कॉलम सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. खाने और उससे जुड़े विवादों पर लिखते हुए ट्विंकल ने अपने लेख में मुगल इतिहास और मुगलई व्यंजनों का जिक्र किया. उनकी इसी टिप्पणी पर सोशल मीडिया यूजर शीमा खेर ने आपत्ति जताई और इसे लेकर एक लंबी पोस्ट लिखी.
शीमा खेर ने ट्विंकल की टिप्पणी को ‘न मजाकिया, न समझदारी भरा’ बताते हुए सवाल उठाया कि ऐतिहासिक घटनाओं और उस दौर की हिंसा को खाने के उदाहरण से जोड़ना कितना उचित है.
ट्विंकल खन्ना ने अपने कॉलम में क्या लिखा?
30 अगस्त को प्रकाशित अपने ‘मिसेज फनीबोन्स’ कॉलम में ट्विंकल खन्ना ने खाने और उसमें इस्तेमाल होने वाली चीजों को लेकर होने वाली बहस का जिक्र किया था. उन्होंने लिखा था कि जो लोग इतिहास की किताबों से मुगलों का नाम हटाना चाहते हैं, उन्हें अपने खाने से भी मुगलई व्यंजनों को हटाने से शुरुआत करनी चाहिए. इसी संदर्भ में उन्होंने कोफ्ते, कोरमा, कबाब और मुगलई पनीर जैसे व्यंजनों का उदाहरण दिया. ट्विंकल की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने सवाल उठाना शुरू कर दिया.
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शीमा खेर ने जताई आपत्ति
शीमा खेर ने ट्विंकल खन्ना की पोस्ट पर अपना रिएक्शन साझा करते हुए कहा कि खाने की तुलना इतिहास के हिंसक दौर से करना उन्हें उचित नहीं लगता. उन्होंने अपनी पोस्ट की शुरुआत इस बात से की कि ‘क्रूर इतिहास’ की तुलना खाने से करना न तो मजाकिया है और न ही समझदारी भरा. इसके बाद उन्होंने इतिहास को समझने और उसके अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा करने की जरूरत पर जोर दिया.
‘केसरी’ फिल्म का भी किया जिक्र
शीमा खेर ने अपनी बात रखने के लिए अक्षय कुमार की फिल्म ‘केसरी’ का उदाहरण भी दिया. यह फिल्म सारागढ़ी की लड़ाई की पृष्ठभूमि पर आधारित थी और इसमें अक्षय कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई थी. खेर ने दावा किया कि ऐसी ऐतिहासिक घटनाओं को फिल्मों के जरिए लोगों तक पहुंचाने की जरूरत इसलिए पड़ती है क्योंकि उनके मुताबिक, स्कूल की किताबों में इतिहास के कई महत्वपूर्ण हिस्सों पर पर्याप्त चर्चा नहीं होती.
उन्होंने इसी संदर्भ में ट्विंकल खन्ना से सवाल किया कि अगर कोई व्यक्ति ऐतिहासिक हिंसा पर बनी फिल्म देख सकता है, उसमें वीरता की सराहना कर सकता है और इसके बाद सामान्य जीवन जी सकता है, तो इतिहास से जुड़ी बहस में खाने को तर्क के रूप में क्यों इस्तेमाल किया जाना चाहिए.