म्यूजिक इंडस्ट्री में एक दुख भरी खबर आई है. 90 के दशक का सुपरहिट गाना 'तुम तो ठहरे परदेसी साथ क्या निभाओगे' लिखने वाले गीतकार जहीर आलम का 11 मई को नागपुर में निधन हो गया. अल्ताफ राजा की आवाज में यह गाना उस समय हर किसी के दिल को छू गया था और आज भी पुरानी यादों को ताजा कर देता है.
जहीर आलम नागपुर के मोमिनपुरा इलाके में एक साधारण से छोटे घर में रहते थे. उनका गाना भले ही पूरे देश में छा गया, लेकिन उनकी अपनी जिंदगी संघर्ष और आर्थिक तंगी से भरी रही. वे पिछले कई सालों से आम लोगों की नजरों से लगभग ओझल हो चुके थे. 'तुम तो ठहरे परदेसी' शुरू में स्थानीय कव्वाली के रूप में गाया जाता था. जब अल्ताफ राजा ने इसे अपनी अनोखी आवाज दी तो गाना रातोंरात हिट हो गया.
90 के दशक में यह गाना शादियों, कार्यक्रमों और रेडियो पर हर जगह बजता था. लोग इसके बोल गुनगुनाते थे और भावुक हो जाते थे. लेकिन इस अमर गीत के लेखक को इसका जितना फायदा मिलना चाहिए था, उतना नहीं मिला. बताया जाता है कि जहीर आलम को इस गाने के लिए सिर्फ 3 हजार रुपये मिले थे. इतना बड़ा हिट गाना लिखने के बाद भी उन्हें कभी वह पहचान और आर्थिक सुरक्षा नहीं मिली जो उन्हें मिलनी चाहिए थी.
जहीर आलम ने अपनी जिंदगी में कपड़ा मील में भी काम किया था. उस समय उनकी आर्थिक स्थिति ठीक थी. लेकिन जब मिल बंद हो गई तो उनके लिए मुश्किलें शुरू हो गईं. वे छोटे-मोटे काम करके परिवार का गुजारा करते रहे. म्यूजिक इंडस्ट्री में एक बार हिट गीत लिख लेने के बाद भी उन्हें आगे कोई बड़ा मौका नहीं मिला. वे गुमनामी में ही अपना जीवन बिताते रहे. उनके चाहने वाले और स्थानीय संगीत प्रेमी अब उनके निधन पर शोक व्यक्त कर रहे हैं.