मुंबई: हिंदी सिनेमा के चर्चित निर्माता साजिद नाडियावाला आज 18 फरवरी को 60 साल के हो गए हैं. चार दशक से अधिक समय से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय साजिद ने कई बड़ी और यादगार फिल्मों का निर्माण किया है. उनका नाम आज सफल और दूरदर्शी निर्माताओं में गिना जाता है. हालांकि उनकी जिंदगी का सफर सीधा फिल्मों तक नहीं पहुंचा था. इसके पीछे एक अधूरा सपना और संघर्ष की लंबी कहानी छुपी है.
18 फरवरी 1966 को मुंबई में जन्मे साजिद नाडियाडवाला एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसका सिनेमा से पुराना रिश्ता रहा है. उनके पिता सुलेमान नाडियाडवाला और मां शफकत नाडियाडवाला थे. दादा और चाचा भी फिल्म निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय थे. घर का माहौल रचनात्मक था और फिल्मों पर चर्चा आम बात थी. यही कारण रहा कि बचपन से ही उन्हें सिनेमा की दुनिया देखने और समझने का अवसर मिला.
बता दें की फिल्मीं बैकग्राउंड से आने के बाद भी साजिद ने शुरूआत में अलग राह चुनने की ठानी थी. वह पढ़ाई में बेहद होनहार थे. उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी और कानून की पढ़ाई की. उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाना था. वह भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बनना चाहते थे. इस सपने को साकार करने के लिए उन्होंने परीक्षा की तैयारी की और प्रयास भी किया.
लेकिन जीवन हर बार हमारी योजना के अनुसार नहीं चलता. जिस विषय में उन्हें सबसे अधिक आत्मविश्वास था उसी में वह सफल नहीं हो सके. यह उनके लिए निराशाजनक पल था. एक बड़ा सपना अधूरा रह गया. मगर इसी मोड़ ने उनके जीवन की दिशा बदल दी. असफलता ने उन्हें तोड़ा नहीं बल्कि नई राह चुनने की प्रेरणा दी.
फिल्मी दुनिया में उनकी एंट्री भी बेहद साधारण तरीके से हुई. उन्होंने सीधे निर्माता की कुर्सी नहीं संभाली. अपने करियर की शुरुआत उन्होंने फिल्म गुलामी के दौरान की. इस फिल्म में मशहूर एक्टर Dharmendra मुख्य भूमिका में थे और निर्देशन की जिम्मेदारी J P Dutta के पास थी. उस समय साजिद ने सेट पर स्पॉटबॉय और सहायक के रूप में काम किया.
उन्होंने खुद बताया था कि उस दौर में उनका काम कलाकारों की जरूरतों का ध्यान रखना, सेट पर छोटी मोटी व्यवस्थाएं संभालना और हर स्थिति में मौजूद रहना था. कभी चाय लाना, कभी बर्फ का इंतजाम करना, तो कभी कमरे की व्यवस्था देखना. इन अनुभवों ने उन्हें फिल्म निर्माण की बारीकियां सिखाईं. उन्होंने हर जिम्मेदारी को सीखने का अवसर माना.
सिर्फ 25 वर्ष की आयु में साजिद ने अपना प्रोडक्शन हाउस Nadiadwala Grandson Entertainment स्थापित किया. इतनी कम उम्र में यह कदम उठाना साहस की बात थी. लेकिन पारिवारिक अनुभव और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने इसे आगे बढ़ाया. धीरे धीरे उनका बैनर इंडस्ट्री में भरोसे का नाम बन गया.
अपने लंबे करियर में उन्होंने कई सफल फिल्मों का निर्माण किया. जीत, किक, मुझसे शादी करोगी, हाउसफुल, जुड़वा, हे बेबी और 2 स्टेट्स जैसी फिल्मों ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया. उनकी फिल्मों में मनोरंजन के साथ व्यावसायिक समझ भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनकी अधिकांश फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करती रही हैं.