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Game Changer Day 1: पुष्पा 2 के बाद बॉक्स ऑफिस पर बजा राम चरण की गेम चेंजर का डंका, पहले दिन की इतनी कमाई

'गेम चेंजर' ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर धमाकेदार शुरुआत की है, लेकिन अब यह देखना होगा कि फिल्म आने वाले दिनों में अपनी सफलता को बनाए रख पाती है या नहीं. फिलहाल, फिल्म सिनेमाघरों में चल रही है और दर्शकों की पसंद का इंतजार किया जा रहा है.

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Babli Rautela

Game Changer Box Office Day 1: राम चरण और कियारा आडवाणी की हालिया रिलीज फिल्म 'गेम चेंजर' ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त शुरुआत की है. फिल्म ने अपने पहले दिन भारत में 51.25 करोड़ रुपये की शानदार कमाई की है, जो फिल्म की सफलता की शुरुआत को दर्शाता है. यह फिल्म शंकर ने डायरेक्ट की है और एस.एस. राजामौली की ब्लॉकबस्टर 'आरआरआर' के बाद राम चरण की पहली सोलो रिलीज है, जिसे दर्शकों से भारी उम्मीदें थीं.

गेम चेंजर का पहले दिन का कलेक्शन

'गेम चेंजर' के पहले दिन के कलेक्शन में तेलुगु वर्जन ने सबसे बड़ी हिस्सेदारी बनाई, जिसमें 42 करोड़ रुपये की कमाई की. इसके बाद हिंदी वर्जन ने 7 करोड़ रुपये का योगदान किया, जबकि तमिल वर्जन ने 2.1 करोड़ रुपये और कन्नड़ व मलयालम वर्जन ने 0.1 करोड़ रुपये और 0.05 करोड़ रुपये की कमाई की.

इस प्रकार, फिल्म ने अपनी अलग अलग भाषाओं में धमाकेदार शुरुआत की, जो उसकी विस्तृत पहुमच और दर्शकों की रुचि को दर्शाता है.

फिल्म पर फैंस के रिएक्शन

फिल्म को लेकर मिले-जुले रिव्यू मिल रहे हैं, हालांकि शुरुआत में अच्छे कलेक्शन ने इसके बॉक्स ऑफिस पर संभावित सफलता की ओर इशारा किया है. अगर फिल्म अपनी गति बनाए रखती है और दर्शकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करती है, तो 'गेम चेंजर' बॉक्स ऑफिस पर लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन कर सकती है. खासकर संक्रांति के समय रिलीज होने के कारण फिल्म को काफी टक्कड़ का सामना करना पड़ेगा, जिसमें 'डाकू महाराज' और 'फतेह' जैसी फिल्मों से टक्कर हो रही है.

पुष्पा 2 का दबाव

फिल्म के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह हो सकती है कि वह सिनेमाघरों में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखे, क्योंकि अल्लू अर्जुन की 'पुष्पा 2: द रूल' अभी भी सिनेमाघरों में अच्छा प्रदर्शन कर रही है, यहां तक कि उसकी रिलीज को एक महीने से ज्यादा हो चुका है. उसके बावजूद भी फैंस का क्रेज इस फिल्म को लेकर बरकरार है.

बता दें की गेम चेंजर में राम चरण ने अपनी दोहरा किरदार निभाया और राम नंदन और अपन्ना, में फिल्म को अपनी जान और आत्मा दी है. उन्होंने इस औसत दर्जे के राजनीतिक नाटक में सारी जिम्मेदारी उठाई. वहीं, एस.जे. सूर्या अपनी भावनाओं को चीखते हुए और जोरदार तरीके से प्रस्तुत करते हैं. इन दोनों के अलावा, जयराम और उनके मजेदार वन-लाइनर्स ने फिल्म में हास्य का तड़का लगाया.