कभी सड़कों पर पैदल भटक कर काम मांगते थे, आज विलेन बनकर निकलवाई लोगों की चीखें, पहचाना?
प्रकाश राज का सफर संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी है. कभी काम के लिए पैदल घूमते थे और आज हर किरदार में जान डालने वाले शानदार एक्टर बन चुके हैं. एक्टर के जन्मदिन पर आइए उनकी जर्नी के बारे में विस्तार से जानते हैं.
मुंबई: प्रकाश राज आज भारतीय सिनेमा का ऐसा नाम हैं जो किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. लेकिन उनकी सफलता के पीछे एक लंबा और कठिन संघर्ष छिपा है. 26 मार्च को जन्मे प्रकाश राज का असली नाम प्रकाश राय था. फिल्मों में आने के बाद उन्होंने अपना सरनेम बदलकर राज कर लिया और यही नाम उनकी नई पहचान बन गया.
शुरुआती दिनों में उनके पास कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं था. काम पाने के लिए उन्हें एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो तक पैदल जाना पड़ता था. कई बार निराशा हाथ लगी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.
थिएटर से शुरू हुआ था प्रकाश राज का करियर
फिल्मों में आने से पहले प्रकाश राज थिएटर करते थे. उस समय उन्हें महीने के सिर्फ 300 रुपये मिलते थे. लेकिन यही मंच उनके अभिनय की असली पाठशाला बना. थिएटर के अनुभव ने उन्हें अभिनय की बारीकियां सिखाईं. धीरे धीरे उन्हें टीवी शोज में काम मिलने लगा. भाषा उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि वह कन्नड़ भाषी थे. लेकिन उन्होंने तमिल तेलुगू और मलयालम जैसी भाषाएं सीखी और खुद को हर इंडस्ट्री में साबित किया.
साउथ सिनेमा में मिला बड़ा ब्रेक
तमिल फिल्म ड्युएट से उन्हें बड़ा ब्रेक मिला. इस फिल्म में उन्होंने अपने अभिनय से सबका ध्यान खींचा. इसके बाद घिल्ली, पोकिरी और ओक्काडु जैसी फिल्मों में उनके विलेन किरदार ने दर्शकों के दिलों में डर पैदा कर दिया. उनकी खासियत यह रही कि वह हर किरदार को अलग अंदाज में पेश करते थे. उनकी बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग डिलीवरी उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती है.
हिंदी सिनेमा में उन्होंने वॉन्टेड से एंट्री की. इसके बाद सिंघम में जयकांत शिखरे का किरदार निभाकर उन्होंने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बना ली. उनका डायलॉग और गुस्से वाला अंदाज आज भी लोगों को याद है. खास बात यह है कि उन्होंने अपने किरदार को और प्रभावी बनाने के लिए खुद अपनी बॉडी लैंग्वेज तैयार की थी. इसके बाद उन्होंने दबंग 2, सिंघम रिटर्न्स और हीरोपंती जैसी फिल्मों में अपनी नेगेटिव इमेज को और मजबूत किया.
विलेन नहीं हर किरदार में माहिर
प्रकाश राज ने खुद को सिर्फ विलेन तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने कई भावुक और गंभीर किरदार भी निभाए हैं. फिल्म अभियुम नानुम और आकाशमंता में उन्होंने एक ऐसे पिता का किरदार निभाया जो अपनी बेटी के लिए जीता है. वहीं धोनी में भी उनके पिता वाले रोल ने दर्शकों को भावुक कर दिया.
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