मलयालम सिनेमा को बड़ा झटका, नेशनल अवॉर्ड विजेता डायरेक्टर आर सारथ का निधन, 65 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
केरल के कोल्लम जिले के पुनलूर गांव के रहने वाले सारथ ने मलयालम सिनेमा को कई महत्वपूर्ण फिल्में दीं. साथ ही उन्होंने सांस्कृतिक क्षेत्र और सरकारी विभागों में भी सक्रिय भूमिका निभाई. वे फिल्म निर्माण के साथ-साथ शोध और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के काम में भी लगे रहते थे.
R Sarath Dies: राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और सांस्कृतिक कार्यकर्ता आर. सारथ का 65 वर्ष की आयु में निधन हो गया. सोमवार, 7 सितंबर की सुबह तिरुवनंतपुरम के केआईएमएस अस्पताल में उनका निधन हुआ. वे किडनी संबंधी बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थे.
नेशनल अवॉर्ड विजेता डायरेक्टर आर सारथ का निधन
केरल के कोल्लम जिले के पुनलूर गांव के रहने वाले सारथ ने मलयालम सिनेमा को कई महत्वपूर्ण फिल्में दीं. साथ ही उन्होंने सांस्कृतिक क्षेत्र और सरकारी विभागों में भी सक्रिय भूमिका निभाई. वे फिल्म निर्माण के साथ-साथ शोध और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के काम में भी लगे रहते थे.
65 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
आर. सारथ ने साल 2000 में अपनी पहली फिल्म 'सायाह्नम' से निर्देशन और लेखन की शुरुआत की. यह फिल्म बहुत पसंद की गई. इसे सात केरल राज्य फिल्म पुरस्कार मिले. साथ ही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला, जो सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म के लिए दिया जाता है. 2001 में म्यूनिख अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में यह फिल्म प्रतियोगिता खंड में दिखाई गई. इसके बाद कई अंतरराष्ट्रीय महोत्सवों में भी इसका प्रदर्शन हुआ, जिससे सारथ का नाम भारत से बाहर भी पहुंचा.
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2003 में उन्होंने 'स्थिति' नाम की फिल्म बनाई. यह फिल्म बैंकॉक अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में दिखाई गई. 2006 में आई उनकी फिल्म 'शीलावती' सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित थी. इसका प्रीमियर ताइवान में एशिया पैसिफिक फिल्म फेस्टिवल में हुआ. 2011 में उन्होंने 'द डिजायर, अ जर्नी ऑफ अ वुमन' नाम की हिंदी फिल्म बनाई. यह भारत-चीन की साझेदारी में बनी थी. इसमें एक महिला की जीवन यात्रा दिखाई गई थी. यह फिल्म भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने वाले उनके प्रयासों में शामिल थी.
सारथ की फिल्में आम तौर पर गंभीर विषयों पर आधारित होती थीं. वे कहानी को सरल तरीके से बताते थे और समाज के मुद्दों को सामने रखते थे. उनकी फिल्मों ने कई पुरस्कार और सम्मान जीते. फिल्मों के अलावा उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शोध कार्यों में भी योगदान दिया.