‘सुरक्षित वक्त’ में बोलना कैसी बहादुरी? छात्र आंदोलन को लेकर मुनव्वर फारूकी ने फिल्मी सितारों पर उठाए सवाल
छात्र आंदोलन पर मुनव्वर फारूकी ने मशहूर हस्तियों की देर से आई प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सही समय पर आवाज़ उठाना ही असली साहस है, न कि माहौल बदलने के बाद.
अभिनेता और स्टैंड-अप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी ने देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच फिल्मी हस्तियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर तीखी टिप्पणी की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि अधिकांश सेलिब्रिटी तब बोले, जब प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया सामने आई और जनमत बदलता दिखाई देने लगा. उनके मुताबिक, आंदोलन के शुरुआती दिनों में अधिकांश प्रभावशाली चेहरे पूरी तरह खामोश रहे.
‘डर के बिना बोलना ही असली साहस’
मुनव्वर ने अपने संदेश में कहा कि पिछले 25 दिनों तक छात्र सड़कों पर संघर्ष करते रहे, आलोचनाएं झेलते रहे और अपनी आवाज़ बुलंद करने की कीमत भी चुकाते रहे, लेकिन तब अधिकांश मशहूर हस्तियां चुप रहीं. उन्होंने लिखा कि यदि किसी मुद्दे पर स्टैंड लेना है तो वह दबाव या माहौल बदलने के बाद नहीं, बल्कि बिना डर के लेना चाहिए. उनके अनुसार, जनभावना बदलने के बाद दिया गया समर्थन साहस नहीं बल्कि सुविधा का चुनाव माना जाएगा.
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शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
छात्रों का आंदोलन पिछले कई हफ्तों से शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और विशेष रूप से NEET परीक्षा पेपर लीक के आरोपों को लेकर जारी है. विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में प्रदर्शन लगातार तेज़ होते गए. इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन के समर्थन में सामने आए और उन्होंने जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की, जिससे इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक चर्चा मिली.
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावे अलग-अलग
सोमवार को नई दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई. दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया, चेतावनियों के बावजूद पीछे नहीं हटे और आक्रामक रवैया अपनाया. दूसरी ओर, प्रदर्शन में शामिल लोगों का आरोप है कि पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिससे कई छात्र घायल हुए. सोशल मीडिया पर वायरल कई वीडियो भी इस कार्रवाई को लेकर बहस का विषय बने हुए हैं.
देर रात पुलिस की कार्रवाई
गुरुवार देर रात दिल्ली विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया सहित विभिन्न संस्थानों के 25 से अधिक छात्रों को उस समय हिरासत में लिया गया, जब वे जंतर-मंतर की ओर प्रदर्शन के लिए जा रहे थे. पुलिस ने इसे एहतियाती कार्रवाई बताते हुए कहा कि छात्रों पर गैरकानूनी जमावड़े में शामिल होने की आशंका थी. छात्रों का पक्ष है कि शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को सीमित किया गया.