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Manna Dey Death Anniversary: जब मोहम्मद रफी भी हो गए थे मन्ना डे के फैन, मुश्किल गानों के लिए किया जाता था याद

मन्ना डे सिर्फ एक गायक नहीं बल्कि संगीत की एक पूरी पाठशाला थे. उनकी आवाज में वह गहराई थी जो हर किसी को अंदर तक अहसास करवा दें. सिंगर के जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनकी गानों की पसंद के बारे में.

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Edited By: Babli Rautela
Manna Dey Death Anniversary: जब मोहम्मद रफी भी हो गए थे मन्ना डे के फैन, मुश्किल गानों के लिए किया जाता था याद
Courtesy: Instagram

मुंबई: कुछ आवाजें वक्त के साथ फीकी नहीं पड़तीं बल्कि और गहरी होती जाती हैं. जब भी भारतीय संगीत की बात होती है, एक नाम अपने आप जुबान पर आ जाता है. वह नाम है मन्ना डे. उनकी आवाज में ऐसा जादू था कि मुश्किल से मुश्किल गाना भी आसान लगने लगता था. आज उनकी डेथ एनिवर्सरी पर याद करते हैं उस गायक को जिसने करीब 3000 गानों से संगीत की दुनिया को समृद्ध किया.

मन्ना डे का असली नाम प्रबोध चंद्र डे था. उनका जन्म 1 मई 1919 को कोलकाता में हुआ था. बचपन से ही उन्हें संगीत में गहरी रुचि थी. परिवार में भी संगीत का माहौल था, जिससे उनकी नींव मजबूत हुई. उन्होंने अपने चाचा कृष्ण चंद्र डे और उस्ताद दबीर खान से संगीत की बारीकियां सीखी. यह वही ट्रेनिंग थी जिसने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई.

मन्ना डे की करियर की शुरुआत 

मन्ना डे ने अपने करियर की शुरुआत 1942 में आई फिल्म तमन्ना से की थी. शुरुआती दौर में उन्हें भी संघर्ष करना पड़ा. लेकिन उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें धीरे धीरे पहचान दिलाई. उन्होंने हिंदी के साथ साथ बंगाली, मराठी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम और असमी भाषाओं में भी गाने गाए. 

मुश्किल गानों के लिए पहली पसंद

मन्ना डे की सबसे बड़ी खासियत थी उनकी तकनीकी पकड़. जब भी किसी फिल्म में कोई कठिन गाना होता था, संगीतकार सबसे पहले उन्हें ही याद करते थे. क्लासिकल बेस वाले गाने हों या तेज रफ्तार के जटिल गीत, मन्ना डे हर तरह के गानों को बेहद सहजता से गा लेते थे. उनकी आवाज में शुद्धता और ताकत दोनों थी, जो उन्हें बाकी गायकों से अलग बनाती थी.

1968 की फिल्म 'पड़ोसन' का गाना 'एक चतुर नारी' आज भी सबसे मुश्किल गानों में गिना जाता है. इस गाने के लिए मन्ना डे को चुना गया था. शुरुआत में उन्हें किशोर कुमार का मजाकिया अंदाज पसंद नहीं आया था. लेकिन जब उन्हें समझाया गया कि यह फिल्म की कहानी के अनुसार है, तब वह इस गाने के लिए तैयार हुए. नतीजा यह हुआ कि यह गाना इतिहास बन गया.

जब रफी भी थे उनके फैन

मोहम्मद रफी खुद एक महान गायक थे, लेकिन वह भी मन्ना डे की आवाज के दीवाने थे. खाली समय में वह मन्ना डे के गाने सुना करते थे. यह बात अपने आप में बताती है कि मन्ना डे का स्तर कितना ऊंचा था. मन्ना डे ने अपने करियर में कई ऐसे गाने दिए जो आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं. उनके कुछ मशहूर गानों में ‘यशोमति मैया से’, ‘प्यार हुआ इकरार हुआ’, ‘ये रात भीगी भीगी’, ‘कसमें वादे प्यार वफा’, ‘तू प्यार का सागर है’, ‘ये दोस्ती’, ‘जिंदगी कैसी है पहेली’ और ‘आ जा सनम मधुर चांदनी’ शामिल हैं. हर गाने में उनकी अलग पहचान साफ सुनाई देती है.