Lata Mangeshkar Birthday: जिस आवाज को कभी पतली कहकर किया गया नजरअंदाज, उसी ने किया करोड़ों दिलों पर राज
लता मंगेशकर भारतीय संगीत की ऐसी महान आवाज थीं, जिनके गीत कई पीढ़ियों की यादों का हिस्सा बन चुके हैं. इंदौर में जन्मीं लता मंगेशकर ने महज 13 साल की उम्र में फिल्मों के लिए गाना शुरू किया था. शुरुआती दौर में उनकी आवाज को पतली बताकर कई बार नजरअंदाज किया गया, लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिभा से अपनी अलग पहचान बनाई.
भारतीय संगीत की दुनिया में लता मंगेशकर का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. उनकी आवाज ने हिंदी सिनेमा के संगीत को कई दशकों तक अपनी अलग पहचान दी. 28 सितंबर 1929 को इंदौर में जन्मीं लता मंगेशकर ने बेहद कम उम्र में अपने पिता को खो दिया था. इसके बाद परिवार की जिम्मेदारियों ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और संगीत ही उनके लिए आगे बढ़ने का रास्ता बना.
महज 13 साल की उम्र में उन्होंने फिल्मों के लिए गाना शुरू कर दिया था. शुरुआती दिनों में उनके सामने कई मुश्किलें आईं, लेकिन अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर उन्होंने धीरे धीरे ऐसी जगह बनाई, जहां पहुंचना किसी भी कलाकार के लिए बड़ी उपलब्धि है.
आवाज को लेकर हुई थी ट्रोल
लता मंगेशकर के करियर की शुरुआत आसान नहीं रही. उस दौर में उनकी आवाज को बहुत पतली बताकर कई लोगों ने उन्हें पसंद नहीं किया. कई बार उन्हें काम मिलने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. ऐसे समय में संगीतकार गुलाम हैदर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उनका हौसला बढ़ाया. इसके बाद लता मंगेशकर ने लगातार मेहनत की और धीरे धीरे फिल्म संगीत में अपनी मजबूत जगह बना ली.
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सिंगर्स की रॉयल्टी के लिए उठाई आवाज
लता मंगेशकर केवल अपनी गायकी के लिए ही नहीं, बल्कि गायकों के अधिकारों को लेकर अपनी स्पष्ट राय रखने के लिए भी जानी जाती थीं. 1960 के दशक में उन्होंने इस बात की मांग उठाई कि गायकों को भी उनके रिकॉर्ड किए गए गानों से रॉयल्टी मिलनी चाहिए. इस मुद्दे पर उनकी मोहम्मद रफी से असहमति हुई. दोनों की राय अलग होने के कारण एक समय उन्होंने साथ में डुएट गाना बंद कर दिया था. हालांकि यह दूरी लंबे समय तक नहीं रही. बाद में संगीतकार जयकिशन की पहल के बाद दोनों के बीच सुलह हुई और लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की आवाज फिर कई गानों में साथ सुनाई दी.
Guinness रिकॉर्ड से भी जुड़ा विवाद
लता मंगेशकर का नाम 1974 में Guinness Book of World Records में सबसे ज्यादा गाने रिकॉर्ड करने वाले कलाकार के तौर पर दर्ज हुआ था. हालांकि इस रिकॉर्ड को लेकर बाद में विवाद भी सामने आया. मोहम्मद रफी की ओर से भी अधिक गाने रिकॉर्ड करने का दावा किया गया था. इसके बाद Guinness के बाद के संस्करणों में रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी में बदलाव देखने को मिला और दोनों गायकों के नामों का उल्लेख किया गया. लता मंगेशकर ने अपने लंबे करियर में कई भाषाओं में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी और भारतीय संगीत पर उनकी छाप कई दशकों तक बनी रही.
Royal Albert Hall में रचा खास इतिहास
लता मंगेशकर के अंतरराष्ट्रीय करियर की सबसे चर्चित उपलब्धियों में लंदन का Royal Albert Hall भी शामिल है. साल 1974 में उन्होंने इस प्रतिष्ठित हॉल में परफॉर्म किया. यह उनके अंतरराष्ट्रीय संगीत सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है. उनके इस प्रदर्शन ने भारतीय गायकी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी बड़ी पहचान दिलाई.
भारतीय संगीत में उनके योगदान के लिए लता मंगेशकर को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न सहित कई बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. उनकी आवाज हिंदी सिनेमा की कई पीढ़ियों की अभिनेत्रियों के साथ जुड़ी. अलग अलग दौर की फिल्मों में उनके गीतों ने किरदारों और कहानियों को एक अलग भाव दिया. यही वजह है कि लता मंगेशकर की आवाज केवल एक गायिका की आवाज नहीं रही, बल्कि भारतीय सिनेमा की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन गई.
6 फरवरी 2022 को हमेशा के लिए खामोश हुई आवाज
लता मंगेशकर का 6 फरवरी 2022 को निधन हो गया. उनके जाने के साथ भारतीय संगीत जगत ने अपनी सबसे पहचानने योग्य आवाजों में से एक को खो दिया. हालांकि लता मंगेशकर आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज अब भी फिल्मों, रेडियो, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और लोगों की निजी यादों में मौजूद है. उनके गाए गीत हर नई पीढ़ी तक पहुंचते रहे हैं और यही उनकी कला की सबसे बड़ी विरासत है.