Padmaavat Johar Controversy: संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत को लेकर एक बार फिर विवाद गर्म है. अभिनेत्री स्वरा भास्कर के हालिया बयान ने लोगों को नाराज कर दिया है. उन्होंने रानी पद्मावती और उनके साथ सैकड़ों महिलाओं द्वारा किए गए जौहर को बदसलूकी से जोड़ते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त की थीं. उन्होंने कहा था कि वे उस घटना को सुनकर वैसा ही महसूस कर रही थीं जैसे कोई शारीरिक उत्पीड़न का शिकार हो. इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है.
अब कवि और पूर्व सांसद कुमार विश्वास ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है. उन्होंने किसी का नाम लिए बिना साफ शब्दों में कहा कि कुछ लोग जाहिल और जमूरे की तरह इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. विश्वास ने जोर देकर कहा कि राजस्थान का गौरवशाली इतिहास किसी फिल्म, कहानी या कुछ घंटों के कंटेंट से मिटाया नहीं जा सकता.
उन्होंने अपनी पोस्ट या बयान में लिखा कि राजस्थान की मिट्टी रक्त से लिखी गई कुर्बानियों से चंदन जैसी पवित्र है. किसी की दो घंटे की फिल्म या कुछ पंक्तियों की कहानी से राजस्थान और राजस्थानियों के इतिहास का एक कण भी प्रभावित नहीं हो सकता. बशर्ते हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को सही इतिहास बताते रहें.
कुमार विश्वास ने लोगों से अपील की कि दूसरों पर गुस्सा करने से ज्यादा जरूरी है कि हम खुद अपने बच्चों को इतिहास के सही प्रसंग समझाएं. उन्होंने कहा कि अगर समाज अपनी अगली पीढ़ी को इतिहास नहीं बताएगा तो बाद में दूसरों की बातों पर नाराज होने का कोई मतलब नहीं रह जाता. 19वीं मंजिल पर बैठकर देश के इतिहास की व्याख्या करने वाले लोगों पर ज्यादा ध्यान देने की बजाय हमें अपने घरों में सही कहानियां सुनानी चाहिए.
यह विवाद पद्मावत फिल्म के समय से ही चला आ रहा है. फिल्म में रानी पद्मावती की कहानी को दर्शाया गया था और जौहर की घटना ऐतिहासिक महत्व रखती है. कई इतिहासकार और समाज के लोग इसे महिलाओं की अस्मिता और आत्मसम्मान की रक्षा का प्रतीक मानते हैं. स्वरा भास्कर के बयान को कुछ लोगों ने इतिहास के अपमान के रूप में देखा तो कुछ ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा बनाया.
कुमार विश्वास का रुख साफ है. वे कहते हैं कि इतिहास को बदला नहीं जा सकता. फिल्में मनोरंजन के लिए होती हैं लेकिन असल घटनाओं की गरिमा बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने राजस्थान की वीरता और बलिदान को फिर से याद दिलाया और कहा कि रक्त से लिखी कहानियां कभी धूमिल नहीं हो सकतीं.