बॉलीवुड ही नहीं हॉलीवुड में भी बजा इस 79 साल के हीरो का डंका, थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है लाइफ
कबीर बेदी आज 79 साल के हो गए हैं. उनका जीवन और करियर संघर्ष सफलता और अंतरराष्ट्रीय पहचान से भरा रहा है. मॉडलिंग से फिल्मों तक और भारत से विदेशों तक उनका सफर किसी फिल्मी कहानी जैसा है.
मुंबई: कबीर बेदी का जन्म 16 जनवरी 1946 को लाहौर में एक सिख परिवार में हुआ था. बचपन से ही उनका रुझान कला और अभिनय की ओर था. देश के बंटवारे के बाद उनका परिवार भारत आ गया. पढ़ाई के दौरान ही कबीर को मंच और कैमरे की दुनिया आकर्षित करने लगी. कॉलेज के दिनों में उन्होंने थिएटर और मॉडलिंग में हाथ आजमाया. यही वो दौर था जब उन्होंने तय कर लिया कि उनका भविष्य ग्लैमर और अभिनय से जुड़ा होगा.
कबीर बेदी ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी. उनकी पर्सनालिटी और आवाज ने उन्हें जल्द ही अलग पहचान दिला दी. मॉडलिंग में नाम कमाने के बाद उनका रुख फिल्मों की ओर हुआ. साल 1971 में आई उनकी पहली हिंदी फिल्म हलचल ने उन्हें बॉलीवुड में एंट्री दिलाई. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
बॉलीवुड में कबीर बेदी की दमदार मौजूदगी
कबीर बेदी ने हिंदी सिनेमा में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं हैं. खून भरी मांग में उनका खलनायक अंदाज काफी पसंद किया गया. मैं हूं ना और द हीरो लव स्टोरी ऑफ अ स्पाई जैसी फिल्मों में भी उनकी मौजूदगी मजबूत रही. वह उन गिने चुने कलाकारों में शामिल रहे जो हर तरह के किरदार में सहज नजर आए. चाहे विलेन हो या सशक्त सहायक भूमिका कबीर ने हर बार खुद को साबित किया.
यूरोप में बने सुपरस्टार
कबीर बेदी का करियर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने इटली में बनी टीवी सीरीज सैंडोकन में अहम किरदार निभाए हैं. इस सीरीज ने यूरोप में जबरदस्त सफलता हासिल की. सैंडोकन ने कबीर बेदी को यूरोप का सुपरस्टार बना दिया. वहां उनकी लोकप्रियता किसी बड़े हीरो से कम नहीं थी. आज भी इस किरदार के लिए उन्हें याद किया जाता है.
कबीर बेदी ने हॉलीवुड में भी काम कर भारत का नाम रोशन किया. फिल्म ऑक्टोपसी में उन्होंने जेम्स बॉन्ड सीरीज के विलेन का किरदार निभाया. यह भूमिका उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है. इस फिल्म के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और वह दुनिया भर में जाने पहचाने चेहरे बन गए.
कबीर बेदी को मिले पुरस्कार और सम्मान
कबीर बेदी को उनके योगदान के लिए कई सम्मान मिले हैं. भारत के साथ साथ विदेशों में भी उन्हें सराहा गया. अभिनय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में योगदान के लिए उन्हें अलग अलग मंचों पर सम्मानित किया गया है.
79 साल की उम्र में भी कबीर बेदी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं. उनका जीवन बताता है कि सीमाएं केवल दिमाग में होती हैं. भारत से निकलकर दुनिया भर में पहचान बनाना आसान नहीं था लेकिन उन्होंने यह कर दिखाया. उनका करियर किसी थ्रिलर फिल्म की तरह उतार चढ़ाव से भरा रहा और हर मोड़ पर उन्होंने खुद को साबित किया.