7वीं के बाद छोड़ दी पढ़ाई, पेन बेचकर गुजारा करते थे जॉनी लीवर; फिर बने बॉलीवुड के कॉमेडी किंग

कभी मुंबई की सड़कों पर पेन बेचकर गुजारा करने वाले जॉनी लीवर की जिंदगी में एक्टर सुनील दत्त की नजर पड़ना बड़ा मोड़ साबित हुआ. मिमिक्री से लोगों को हंसाने वाले जॉनी लीवर ने फिल्मों में कदम रखा और 300 से ज्यादा फिल्मों में काम कर बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय कॉमेडियन में अपनी जगह बनाई.

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Babli Rautela

मुंबई: बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन जॉनी लीवर आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. अपने खास अंदाज, जबरदस्त मिमिक्री और शानदार एक्सप्रेशन से उन्होंने दर्शकों को सालों तक खूब हंसाया है. लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था. जॉनी लीवर का असली नाम जॉन प्रकाश राव जनुमाला है. उनका जन्म 14 अगस्त 1957 को आंध्र प्रदेश के प्रकाशम इलाके में हुआ था. हालांकि उनका बचपन मुंबई में बीता. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. यही वजह रही कि उन्हें सातवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी. कम उम्र में ही परिवार की मदद करने के लिए उन्होंने काम करना शुरू कर दिया था. इसी दौरान वह मुंबई की सड़कों पर पेन बेचते थे.

पेन बेचते हुए दिखाया मिमिक्री का हुनर

जॉनी लीवर का अंदाज बाकी लोगों से बिल्कुल अलग था. वह सिर्फ पेन बेचने तक सीमित नहीं रहते थे, बल्कि ग्राहकों का ध्यान खींचने के लिए फिल्मी सितारों और अलग अलग लोगों की मिमिक्री किया करते थे. धीरे धीरे उनकी मिमिक्री लोगों के बीच पसंद की जाने लगी. यही हुनर आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पहचान बना. इसके बाद जॉनी लीवर ने हिंदुस्तान यूनिलीवर में नौकरी की. वहां भी वह अपने साथ काम करने वाले लोगों और अधिकारियों की मिमिक्री करके सभी को हंसाते थे. उनके इसी अंदाज की वजह से साथी उन्हें मजाक में जॉनी लीवर कहने लगे और यही नाम आगे चलकर उनकी पहचान बन गया.

1981 में नौकरी छोड़कर चुना स्टेज का रास्ता

जॉनी लीवर की कॉमेडी और मिमिक्री का असर लगातार बढ़ रहा था. उन्होंने स्टेज शो करना शुरू किया और कई बड़े कलाकारों के साथ कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. लाइव शो में उनके प्रदर्शन को लोगों की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिलने लगी. आखिरकार करीब 1981 में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया और पूरी तरह मनोरंजन की दुनिया में आ गए. यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन जॉनी को अपने हुनर पर भरोसा था.


सुनील दत्त की नजर ने बदल दी जिंदगी

जॉनी लीवर के करियर में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब अभिनेता सुनील दत्त की नजर उनके हुनर पर पड़ी. सुनील दत्त ने उन्हें फिल्म दर्द का रिश्ता में काम करने का मौका दिया. फिल्मों में शुरुआत के दौरान जॉनी को ज्यादातर छोटे और सहायक किरदार मिले. लेकिन उनका अंदाज ऐसा था कि छोटे रोल में भी दर्शकों का ध्यान उनकी तरफ चला जाता था. उनकी कॉमेडी में सिर्फ संवाद नहीं बल्कि चेहरे के हावभाव और आवाज की नकल का भी खास योगदान था.

जॉनी लीवर के करियर में फिल्म बाजीगर एक अहम पड़ाव साबित हुई. इस फिल्म के बाद उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी. इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में यादगार कॉमेडी किरदार निभाए. बाबूलाल, छोटा छत्री और असलम भाई जैसे किरदारों ने दर्शकों के बीच उनकी अलग पहचान बना दी. जॉनी की खासियत यह रही कि वह छोटे से छोटे किरदार को भी अपनी कॉमेडी और एक्सप्रेशन से यादगार बना देते थे.

300 से ज्यादा फिल्मों में किया काम

लंबे फिल्मी करियर में जॉनी लीवर ने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है. उन्होंने कई बड़े कलाकारों के साथ स्क्रीन शेयर की और हिंदी सिनेमा की कॉमेडी को अपनी अलग शैली दी. उनके अभिनय को कई बार पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया. फिल्म दीवाना मस्ताना और दूल्हे राजा के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट कॉमेडियन अवॉर्ड मिला. फिल्मों के अलावा जॉनी लीवर ने टेलीविजन और स्टेज पर भी अपनी कॉमेडी का जलवा दिखाया. सड़क किनारे पेन बेचने से लेकर बॉलीवुड में 300 से ज्यादा फिल्मों तक का जॉनी लीवर का सफर इस बात की मिसाल है कि अगर हुनर और मेहनत पर भरोसा हो तो मुश्किल हालात भी कामयाबी का रास्ता रोक नहीं सकते.