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'जन नायकन' के विवाद के बीच राम गोपाल वर्मा ने सेंसर बोर्ड पर साधा निशाना, बताया आउटडेटेड

विजय की आखिरी फिल्म 'जन नायकन' की रिलीज सीबीएफसी के साथ सेंसर संबंधी मुद्दों के कारण स्थगित होने के बाद, फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा और मारी सेल्वराज ने इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की है.

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Edited By: Antima Pal
'जन नायकन' के विवाद के बीच राम गोपाल वर्मा ने सेंसर बोर्ड पर साधा निशाना, बताया आउटडेटेड
Courtesy: x

मुंबई: थलापति विजय की फिल्म 'जन नायगन' जो उनकी आखिरी फिल्म मानी जा रही है, पोंगल रिलीज से अनिश्चितकाल के लिए टल गई है. निर्देशक एच. विनोथ की यह राजनीतिक एक्शन थ्रिलर CBFC से प्रमाणपत्र न मिलने के कारण फंस गई. मद्रास हाई कोर्ट में 9 जनवरी को सुनवाई हुई, जहां पहले एक जज ने U/A 16+ सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया, लेकिन CBFC की अपील पर डिवीजन बेंच ने अंतरिम स्टे लगा दिया. अब अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी.

राम गोपाल वर्मा ने सेंसर बोर्ड पर साधा निशाना

फिल्म में विजय के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, ममिता बैजू, प्रकाश राज जैसे कलाकार हैं. यह विजय का राजनीतिक सफर शुरू करने से पहले आखिरी प्रोजेक्ट है, इसलिए फैंस में काफी उत्साह था. प्रोड्यूसर ने पहले ही रिलीज पोस्टपोन कर दी थी और फैंस से माफी मांगी, कहा कि 'विजय को वह विदाई मिलनी चाहिए जो उन्होंने कमाई है.'

इस विवाद पर बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा ने X पर लंबा पोस्ट लिखकर CBFC को पुराना और बेकार बताया. उन्होंने कहा- 'यह सिर्फ जन नायगन या विजय की बात नहीं, बल्कि कुल मिलाकर CBFC आज बिल्कुल अप्रासंगिक है. इसका उद्देश्य बहुत पहले खत्म हो चुका है, लेकिन उद्योग की आलस्य की वजह से यह जिंदा है.'

इस सिस्टम पर सवाल उठाना चाहिए

राम गोपाल वर्मा ने आगे लिखा कि इंटरनेट के जमाने में 12 साल का बच्चा आतंकवादी वीडियो देख सकता है, 9 साल का पोर्न, यूट्यूब पर गाली-गलौज भरे वीडियो हैं. ऐसे में फिल्म में एक शब्द काटना, शॉट छोटा करना या सिगरेट ब्लर करना समाज की रक्षा करेगा, यह मजाक है. उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री को इस सिस्टम पर सवाल उठाना चाहिए, न कि हर फिल्म पर अलग-अलग शोर मचाना.

CBFC की कार्रवाई को करार दिया 'खुला अन्याय'

इसी मुद्दे पर निर्देशक मारी सेल्वराज ने भी CBFC की कार्रवाई को 'खुला अन्याय' करार दिया. उन्होंने X पर तमिल में पोस्ट किया, 'जन नायगन के खिलाफ सेंसर बोर्ड की कार्रवाई स्पष्ट अन्याय है. क्रिएटर के तौर पर हमें अपनी आवाज उठानी चाहिए ताकि लोकतंत्र और क्रिएटिव फ्रीडम पर फैल रहा डर खत्म हो सके.' 

यह विवाद सिर्फ जन नायगन तक सीमित नहीं, क्योंकि इसी समय सिवकार्थिकेयन की पराशक्ति को भी CBFC से कई कट्स के बाद क्लियरेंस मिला. तमिल फिल्म इंडस्ट्री में सेंसरशिप के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है. कुल मिलाकर यह मामला सेंसर बोर्ड की प्रासंगिकता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है. क्या CBFC को अब बदलाव की जरूरत है? अगली सुनवाई में क्या फैसला आएगा यह देखना दिलचस्प होगा.