Happy Birthday Piyush Mishra: जिद से जन्मा जादू, प्रियकांत शर्मा से पीयूष मिश्रा बनने तक एक कलाकार की अनोखी कहानी
पीयूष मिश्रा हिंदी सिनेमा और थिएटर के बहुआयामी कलाकार हैं. अभिनेता, सिंगर, लेखक और स्क्रीनराइटर के रूप में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई. आज उनके जन्मदिन पर उनके जीवन और करियर की खास बातें जानें.
मुंबई: पीयूष मिश्रा हिंदी सिनेमा और थिएटर के उन कलाकारों में से हैं, जिनकी अदाकारी और लेखनी का कोई सानी नहीं है. उनकी आवाज, उनका अंदाज और उनका जिद्दी व्यक्तित्व दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है. अभिनेता, लेखक, गायक और कहानीकार के रूप में उन्होंने अपनी अलग छवि बनाई है. आज उनका जन्मदिन है.
प्रियकांत शर्मा से पीयूष मिश्रा तक
पीयूष मिश्रा का जन्म 13 जनवरी 1963 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में प्रियकांत शर्मा के रूप में हुआ था. उनके पिता ने उन्हें अपनी बहन के पास गोद दे दिया, जिसके बाद उनका नाम पीयूष मिश्रा रखा गया. बचपन में ही उनकी जिद और रचनात्मकता दिखाई देने लगी थी. आठवीं कक्षा में लिखी कविता और दसवीं में की गई नाम बदलने की अर्जी ने उनके अंदर के आत्मविश्वास को उजागर किया.
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा और थिएटर में शुरुआत
पीयूष ने 1983 में दिल्ली के NSD में दाखिला लिया और 1986 में वहां से स्नातक किया. पढ़ाई के दौरान ही उनकी एक्टिंग की प्रतिभा उभरी. जर्मन निर्देशक फ्रिट्स बेनीविट्स ने उन्हें ‘हैमलेट’ में कास्ट किया. 1990 में उन्होंने आशीष विद्यार्थी और मनोज बाजपेयी के साथ एक्ट वन नामक थिएटर ग्रुप शुरू किया. ‘गगन दमामा बाज्यो’ जैसे नाटकों ने उन्हें लोकप्रियता दिलाई.
बॉलीवुड में पहचान और स्क्रीनराइटिंग
1998 में मणिरत्नम की फिल्म ‘दिल से…’ से पीयूष ने बॉलीवुड में कदम रखा. इसके बाद उन्होंने ‘द लेजेंड ऑफ भगत सिंह’ के लिए स्क्रीनराइटिंग की. ‘मकबूल’, ‘गुलाल’ और ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय और लेखन को खास पहचान मिली. उनकी भूमिका और डायलॉग ने हर फिल्म को एक अलग आयाम दिया.
सिंगर और ऑथर के रूप में योगदान
पीयूष मिश्रा सिर्फ अभिनेता नहीं बल्कि प्रतिभाशाली सिंगर और लेखक भी हैं. उन्होंने गाने लिखे, कंपोज किए और अपनी आवाज भी दी. ‘इक बगल में चांद’ और ‘आरंभ है प्रचंड’ जैसे गानों ने उन्हें संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय बनाया. इसके अलावा उन्होंने कई कविता संग्रह और आत्मकथा ‘तुम्हारी औकात क्या है… पीयूष मिश्रा’ लिखी, जो बेस्टसेलर रही.
थिएटर और कहानीकार की अद्भुत कला
पीयूष मिश्रा का थिएटर और कहानीकार के रूप में योगदान भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है. अस्मिता थिएटर में उनके सिंगल मैन शो ने दर्शकों का मन मोह लिया. वे मंच पर किरदार को जीवंत कर देते हैं और उनकी आवाज, अभिनय और लेखनी का संगम दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है. आज भी उनके शो में लोग दूर-दूर से आते हैं, उनकी कला और अदाकारी की मिसाल बनने के लिए.