बिना फोन, बिना लैपटॉप के लिखी गई 'हनुमान अंश'! विशाल चतुर्वेदी ने क्यों हटाए थे कमरे से सारे डिवाइस? वजह है बेहद खास

विशाल चतुर्वेदी ने कहा कि उन्होंने कहानी लिखते समय कमरे से सारे डिजिटल डिवाइस हटा दिए थे. लैपटॉप, मोबाइल या अन्य गैजेट्स का इस्तेमाल नहीं किया. उन्होंने पूरी स्क्रिप्ट हाथ से पेन और पेपर पर लिखी. फिल्म नीम करोली बाबा के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित है.

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बॉलीवुड फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है. फिल्म ने 150 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है. इस सफलता के बीच फिल्म के लेखक-निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने अपनी लेखन प्रक्रिया के बारे में दिलचस्प बातें बताई हैं.

बिना फोन, बिना लैपटॉप के लिखी गई 'हनुमान अंश'!

विशाल चतुर्वेदी ने कहा कि उन्होंने कहानी लिखते समय कमरे से सारे डिजिटल डिवाइस हटा दिए थे. लैपटॉप, मोबाइल या अन्य गैजेट्स का इस्तेमाल नहीं किया. उन्होंने पूरी स्क्रिप्ट हाथ से पेन और पेपर पर लिखी. फिल्म नीम करोली बाबा के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित है. उन्होंने बताया कि शुरुआत के दृश्य पर ही करीब 45 दिन लगाए. उसके बाद बाकी कहानी सिर्फ 15 से 20 दिनों में पूरी कर ली.

विशाल चतुर्वेदी ने क्यों हटाए थे कमरे से सारे डिवाइस?

विशाल चतुर्वेदी काफी समय से इस कहानी को फिल्म बनाना चाहते थे. उन्होंने पहले अच्छी रिसर्च की, कई रेफरेंस इकट्ठे किए और आइडियाज को सोचते रहे. जब लिखना शुरू किया तो हाथ से ही सब कुछ नोट किया. बाद में अपने हैंडराइटेन पेजों के फोटो अपने असिस्टेंट्स को भेजते थे. असिस्टेंट्स उन्हें डिजिटल फॉर्म में टाइप कर देते थे. उनका मानना था कि धीरे-धीरे हाथ से लिखने से ध्यान पूरी तरह कहानी पर बना रहता है और डिस्ट्रैक्शन नहीं होता.


हनुमान अंश में शोभिनव सत्या और चंदन आनंद मुख्य भूमिका में हैं. फिल्म की शुरुआत धीमी रही थी लेकिन बाद में दर्शकों का प्यार मिला और यह सरप्राइज हिट बन गई. रिलीज के एक महीने बाद भी कलेक्शन जारी है. 9 सितंबर को यानी 34वें दिन फिल्म ने भारत में नेट 10.25 करोड़ रुपये कमाए. इस दिन 7810 शो चले और औसतन 35 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी रही.

विशाल चतुर्वेदी का यह तरीका आज के डिजिटल दौर में अलग लगता है. ज्यादातर राइटर लैपटॉप पर काम करते हैं लेकिन उन्होंने पुराने अंदाज को चुना. इससे उनकी फोकस बेहतर रहा और कहानी को गहराई से जोड़ पाए. फिल्म अभी भी थिएटर में चल रही है और दर्शक इसे पसंद कर रहे हैं. नीम करोली बाबा की कहानी को सिनेमाई अंदाज में पेश करने की उनकी मेहनत रंग ला रही है.