जब पहली बार ग्रामोफोन पर गूंजा भारतीय सुर, 'क्वीन ऑफ ग्रामोफोन' गौहर जान ने रचा था इतिहास

भारतीय संगीत के इतिहास में गौहर जान का नाम बेहद खास है. साल 1902 में उन्होंने ग्रामोफोन पर राग जोगिया रिकॉर्ड किया था, जिसे भारत के शुरुआती रिकॉर्डेड संगीत में ऐतिहासिक उपलब्धि माना जाता है. अपनी शानदार आवाज और अलग अंदाज के कारण गौहर जान को क्वीन ऑफ ग्रामोफोन कहा गया.

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Babli Rautela

हिंदी सिनेमा का इतिहास भले ही 100 साल से ज्यादा पुराना हो, लेकिन भारतीय संगीत की रिकॉर्डिंग का इतिहास इससे भी पहले शुरू हो चुका था. फिल्मों में गाने और संगीत के दौर से पहले ही भारतीय कलाकारों की आवाज ग्रामोफोन पर रिकॉर्ड की जाने लगी थी. इसी इतिहास में एक ऐसा नाम आता है, जिसने करीब 124 साल पहले अपनी आवाज रिकॉर्ड कराकर भारतीय संगीत की दुनिया में नया अध्याय लिखा. यह नाम था गौहर जान का. उन्हें संगीत की दुनिया में क्वीन ऑफ ग्रामोफोन के नाम से भी जाना जाता है.

1902 में रिकॉर्ड हुआ राग जोगिया

साल 1902 में गौहर जान ने ग्रामोफोन पर राग जोगिया रिकॉर्ड किया था. इसे भारतीय संगीत के शुरुआती रिकॉर्डेड गीतों में ऐतिहासिक स्थान प्राप्त है. उस दौर में रिकॉर्डिंग तकनीक आज की तरह आसान नहीं थी. कलाकारों को एक विशेष रिकॉर्डिंग प्रक्रिया के सामने बैठकर अपनी आवाज देनी होती थी. न माइक्रोफोन की आधुनिक सुविधा थी और न ही आज जैसी एडिटिंग तकनीक. ऐसे समय में गौहर जान का अपनी आवाज रिकॉर्ड करवाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी.

कौन थीं गौहर जान?

गौहर जान भारतीय शास्त्रीय संगीत की शुरुआती लोकप्रिय कलाकारों में गिनी जाती हैं. उनका जन्म 1873 में आजमगढ़ में हुआ था. बचपन से ही उन्हें संगीत में रुचि थी और उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा हासिल की. धीरे धीरे उनकी पहचान सिर्फ एक शास्त्रीय गायिका के तौर पर नहीं रही, बल्कि वह उस दौर की बेहद लोकप्रिय परफॉर्मर बन गईं. उनकी आवाज, गायन शैली और मंच पर प्रस्तुति ने उन्हें आम लोगों के बीच भी लोकप्रिय बना दिया था.


क्यों कहा जाता था क्वीन ऑफ ग्रामोफोन?

गौहर जान की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण उनकी रिकॉर्डिंग का सिलसिला था. उन्होंने वर्ष 1902 से लेकर 1920 के बीच 600 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए. खास बात यह थी कि उनकी रिकॉर्डिंग सिर्फ एक भाषा तक सीमित नहीं थीं. उन्होंने हिंदी, बंगाली, फारसी, फ्रेंच और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में अपनी आवाज रिकॉर्ड कराई. उस समय ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग एक नई तकनीक थी और किसी कलाकार का बार बार रिकॉर्ड होना उसकी लोकप्रियता को दिखाता था. इसी वजह से गौहर जान को संगीत की दुनिया में क्वीन ऑफ ग्रामोफोन कहा जाने लगा.

भारतीय सिनेमा की शुरुआत मूक फिल्मों के दौर से हुई थी. उस समय फिल्मों में आवाज रिकॉर्ड नहीं होती थी. लेकिन इसके समानांतर संगीतकार और गायक अपनी प्रस्तुतियों को रिकॉर्ड करवाने लगे थे. यही वजह है कि भारतीय रिकॉर्डेड संगीत का इतिहास फिल्मों के इतिहास से भी पुराना है. गौहर जान इस बदलाव की सबसे महत्वपूर्ण हस्तियों में से एक थीं. उनकी रिकॉर्डिंग ने भारतीय संगीत को घरों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई.

कई भाषाओं में गाने का था हुनर

गौहर जान की खासियत सिर्फ उनकी आवाज नहीं थी. वह अलग अलग भाषाओं और संगीत शैलियों में गाने की क्षमता रखती थीं. उनकी रिकॉर्डिंग में भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ उस दौर की लोकप्रिय संगीत शैलियों की झलक भी मिलती थी. यही बहुमुखी प्रतिभा उन्हें अपने समय के दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी.