सलमान खान को दिल्ली हाई कोर्ट का नोटिस, जानें चीनी फर्म की किस याचिका पर लिया एक्शन?

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक चीनी AI वॉयस जेनरेशन कंपनी की याचिका पर एक्टर सलमान खान को नोटिस जारी किया है. कंपनी सलमान के पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा से जुड़े कोर्ट के अंतरिम आदेश को रद्द कराने की मांग कर रही है.

Social Media
Babli Rautela

मुंबई: दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में एकटर सलमान खान को एक कानूनी नोटिस जारी किया है, जो एक चीन आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वॉयस जेनरेशन कंपनी की याचिका के बाद सामने आया है. यह मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पर्सनैलिटी राइट्स और AI तकनीक के इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर देश में पहली बार इतने बड़े स्तर पर बहस देखने को मिल रही है.

यह पूरा विवाद 11 दिसंबर 2025 को दिए गए एक अंतरिम आदेश के इर्द गिर्द घूमता है, जिसमें कोर्ट ने सलमान खान के नाम, तस्वीर और आवाज के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. अब उसी आदेश को चीनी AI कंपनी ने चुनौती दी है.

सलमान खान ने क्यों ली थी कोर्ट की शरण

बीते कुछ समय से सलमान खान की पहचान का गलत इस्तेमाल सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से बढ़ा था. AI के जरिए उनकी आवाज में फर्जी विज्ञापन, नकली वीडियो और भ्रामक कंटेंट बनाए जा रहे थे. इन सबको देखते हुए सलमान खान ने अपनी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था. इसके बाद 11 दिसंबर को कोर्ट ने उनके पक्ष में अंतरिम आदेश जारी किया.

इस आदेश के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, डिजिटल इंटरमीडियरी और कमर्शियल वेबसाइट्स को निर्देश दिया गया कि वे सलमान खान की पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल करने वाले कंटेंट को तुरंत हटाएं या ब्लॉक करें.

11 दिसंबर के आदेश में क्या कहा गया था

कोर्ट का यह आदेश खास तौर पर डीपफेक वीडियो, AI से बनी नकली आवाज, झूठे ब्रांड एंडोर्समेंट और अभिनेता की लोकप्रियता का फायदा उठाकर बेचे जा रहे सामान को रोकने के लिए था. इस फैसले को भारत में पर्सनैलिटी राइट्स की दिशा में एक अहम कदम माना गया. इससे यह साफ संदेश गया कि किसी भी सेलिब्रिटी की पहचान का इस्तेमाल बिना इजाजत नहीं किया जा सकता.

चीनी AI कंपनी की आपत्ति

अब इस मामले में एक चीन स्थित AI वॉयस जेनरेशन कंपनी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है. कंपनी का कहना है कि सिंथेटिक आवाजें बनाना उसका कानूनी और कमर्शियल बिजनेस है. कंपनी का तर्क है कि दिसंबर में जारी आदेश के कारण उसकी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और वह अपने वॉयस मॉडल्स को ठीक से डेवलप नहीं कर पा रही है. इसी आधार पर कंपनी ने कोर्ट से उस अंतरिम आदेश को रद्द करने की मांग की है.