मुंबई: कुछ कहानियां सिर्फ सफलता की नहीं होतीं, बल्कि हिम्मत और फैसलों की होती हैं. ऐसी ही कहानी है बिक्रमजीत कंवरपाल की. एक ऐसा नाम जिसने पहले देश की सेवा की और फिर अपने सपनों को जीने के लिए नए करियर में कदन रखा.13 साल तक भारतीय सेना में मेजर के रूप में सेवा करने के बाद उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया, जो हर किसी के लिए आसान नहीं होता. 34 साल की उम्र में उन्होंने अपने करियर की नई शुरुआत की और बॉलीवुड में अपनी जगह बनाई.
बिक्रमजीत कंवरपाल का जन्म हिमाचल प्रदेश के सोलन में हुआ था. उनके पिता द्वारका नाथ कंवरपाल भारतीय सेना के अधिकारी थे और उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था. ऐसे माहौल में पले बढ़े बिक्रमजीत के लिए अनुशासन जीवन का हिस्सा बन गया. उन्होंने द लॉरेंस स्कूल, सनावर में पढ़ाई की, जहां से उनके भीतर एक्टिंग का शौक भी जन्मा.
साल 1989 में उन्होंने भारतीय सेना की हॉडसन्स हॉर्स रेजिमेंट में शामिल होकर अपने करियर की शुरुआत की. बिक्रमजीत कंवरपाल ने 13 साल तक देश की सेवा की. उन्होंने सियाचिन ग्लेशियर जैसे कठिन इलाकों में भी ड्यूटी निभाई. कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए उन्होंने खुद को मजबूत बनाया. लेकिन उनके भीतर एक सपना हमेशा जिंदा रहा, जो उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहा.
जब उनका करियर सेना में अपने शिखर पर था, तब उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया. उन्होंने सेना छोड़कर एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने का जोखिम उठाया. 34 साल की उम्र में मुंबई आना और एक नई शुरुआत करना आसान नहीं था. लेकिन बिक्रमजीत कंवरपाल ने अपने सपने को हकीकत में बदलने का फैसला कर लिया था.
मुंबई आने के बाद उनकी मुलाकात पूजा भट्ट से हुई. इसके बाद उन्हें फिल्म पाप में काम करने का मौका मिला. इस फिल्म के बाद उनके लिए बॉलीवुड के दरवाजे खुल गए. धीरे धीरे उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी जगह बना ली.
बिक्रमजीत कंवरपाल ने कई बड़ी फिल्मों में काम किया. उन्होंने शाहरुख खान के साथ फिल्म डॉन नें काम किया, जहां उनका किरदार काफी पसंद किया गया. इसके अलावा वे रणबीर कपूर के साथ रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर में भी नजर आए.