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गोलू देवता के दरबार में चिट्ठियों से मांगा जाता है न्याय, देश ही नहीं विदेशों से भी आते हैं भक्त

उत्तराखंड के चितई गोलू देवता मंदिर में लोग चिट्ठी लिखकर न्याय मांगते हैं. मान्यता है कि यहां सच्ची प्रार्थना जरूर सुनी जाती है और इंसाफ मिलता है.

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Edited By: Babli Rautela
गोलू देवता के दरबार में चिट्ठियों से मांगा जाता है न्याय, देश ही नहीं विदेशों से भी आते हैं भक्त
Courtesy: Instagram

भारत में आस्था के कई रंग देखने को मिलते हैं. कहीं लोग स्वास्थ्य के लिए मंदिर जाते हैं, तो कहीं सुख समृद्धि के लिए मंदिर के दर्शन करने जाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है जहां लोग सीधे न्याय मांगने जाते हैं. उत्तराखंड की पहाड़ियों में बसा एक ऐसा ही अनोखा मंदिर है, जहां अदालतों से निराश लोग भी उम्मीद लेकर पहुंचते हैं. यहां न कोई लंबी सुनवाई होती है और न ही सालों तक तारीखों का इंतजार होता है. बस एक सच्ची प्रार्थना और विश्वास, और लोग मानते हैं कि उन्हें न्याय जरूर मिलता है. यही वजह है कि चितई गोलू देवता मंदिर आज सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोगों की उम्मीद का केंद्र बन चुका है.

उत्तराखंड को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता. यहां की हर घाटी, हर पहाड़ और हर मंदिर किसी न किसी रहस्य और मान्यता से जुड़ा हुआ है. इन सभी मान्यताओं के बीच गोलू देवता का स्थान बेहद खास है. लोग उन्हें केवल देवता नहीं, बल्कि न्याय के प्रतीक के रूप में पूजते हैं. वहां के लोगों का मानना है कि जहां इंसानी व्यवस्था जवाब दे देती है, वहां से गोलू देवता का दरबार शुरू होता है.

कौन हैं गोलू देवता?

गोलू देवता को न्याय का देवता माना जाता है. मान्यता है कि वे भगवान शिव के अवतार हैं. इसी कारण यहां की पूजा पद्धति और आस्था सीधे शिव से जुड़ी मानी जाती है. लोग मानते हैं कि गोलू देवता सच्चाई के पक्ष में खड़े रहते हैं और झूठ को कभी स्वीकार नहीं करते. यही विश्वास उन्हें बाकी देवी देवताओं से अलग पहचान देता है.

इस मंदिर की सबसे खास बात यहां लटकी हुई हजारों चिट्ठियां हैं. मंदिर परिसर में आपको हर तरफ कागज, आवेदन और स्टांप पेपर नजर आएंगे. ये कोई सामान्य मनोकामनाएं नहीं होतीं. ये उन लोगों की गुहार होती है जो अपने लिए न्याय चाहते हैं. लोग अपनी समस्या, शिकायत या दर्द को एक पत्र में लिखकर यहां टांग देते हैं. उनका विश्वास होता है कि गोलू देवता उनकी बात जरूर सुनेंगे.

यहां आते हैं कोर्ट से निराश लोग

कई लोग ऐसे भी होते हैं जो सालों तक कोर्ट के चक्कर काटने के बाद यहां पहुंचते हैं. उनका मानना होता है कि जहां इंसाफ मिलने में देर हो रही है, वहां गोलू देवता उनके लिए रास्ता खोल सकते हैं. कहा जाता है कि अगर प्रार्थना सच्चे दिल से की जाए, तो यहां जल्दी न्याय मिलता है. यही वजह है कि यह मंदिर न्याय के देवता के रूप में प्रसिद्ध हो गया है.

इस मंदिर की लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. विदेशों में रहने वाले लोग भी यहां अपनी अर्जी भेजते हैं. कुछ लोग खुद यहां आते हैं, तो कुछ अपनी चिट्ठियां पोस्ट के जरिए भेजते हैं. यह दिखाता है कि इस मंदिर की मान्यता कितनी गहरी और व्यापक है. हर साल हजारों लोग यहां पहुंचते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने की उम्मीद लेकर जाते हैं.