10 साल बाद फिर लौटा बाहुबली का जलवा, प्रभास की एंट्री पर देखें दर्शकों का रिएक्शन
एस. एस. राजामौली की कालजयी फिल्म बाहुबली एक बार फिर सिनेमाघरों में लौटी है. इस बार इसका नया रूप 'बाहुबली द एपिक' दर्शकों को 4 घंटे लंबी महागाथा का अनुभव करवा रहा है.
मुंबई: भारतीय सिनेमा में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो समय के साथ फीकी नहीं पड़तीं, बल्कि और भी चमकदार बन जाती हैं. बाहुबली द एपिक ऐसा ही एक सिनेमाई पुनर्जन्म है. एस. एस. राजामौली ने 'बाहुबली: द बिगिनिंग' और 'बाहुबली 2: द कंक्लूजन' को जोड़कर 4 घंटे की नई एडिटेड कट तैयार की है. इस बार फिल्म केवल दो भागों का मेल नहीं, बल्कि एक भावनात्मक पुनर्निर्माण है.
जैसे ही स्क्रीन पर प्रभास के रूप में अमरेंद्र बाहुबली उतरते हैं, थिएटर तालियों और सीटियों से गूंज उठता है. अनुष्का शेट्टी की देवसेना के रूप में शालीनता और दृढ़ता दर्शकों को फिर उसी जादू में खींच लेती है.
कैसी लगी 'बाहुबली द एपिक'?
फिल्म देखने के बाद दर्शकों की प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर छा गई हैं. एक यूजर ने लिखा,पहला हाफ खत्म हुआ. बाहुबली द एपिक! क्या जबरदस्त अनुभव रहा… दिमाग हिला देने वाला इंटरवल बैंगर. भारतीय सिनेमा में इससे पहले कभी नहीं देखा गया.
एम. एम. कीरवाणी का जादुई संगीत
बाहुबली के संगीतकार एम. एम. कीरवाणी ने फिर से दिखाया कि क्यों उन्हें भारतीय सिनेमा का ‘साउंड जादूगर’ कहा जाता है. फैंस सोशल मीडिया पर लगातार लिख रहे हैं कि 'हर बीजीएम फ्रेम-दर-फ्रेम रोमांचक अनुभव देता है.' एक यूजर ने कहा, राजामौली का सिनेमा सिर्फ देखा नहीं जाता, उसे जिया जाता है. कीरवाणी के गूंजते सुर, सिंथेसाइजर और तबले के मेल ने फिल्म को फिर से एक भव्य महाकाव्य में बदल दिया है .
नई एडिटेड कट में राजामौली ने कहानी की रफ्तार को और कस दिया है. दोनों फिल्मों को जोड़ने के बाद कई सीन और भी भावनात्मक हो गए हैं. बाहुबली और भल्लालदेव के बीच शक्ति संघर्ष अब और तीव्र महसूस होता है. दृश्य प्रभाव (VFX) को भी और बेहतर किया गया है जिससे हर युद्ध दृश्य पहले से ज़्यादा भव्य लगता है.