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इक्कीस का नया पोस्टर हुआ रिलीज, अगस्त्य नंदा के अरुण खेत्रपाल के पिता के रोल में नजर आए धर्मेन्द्र

इक्कीस का नया पोस्टर रिलीज होते ही फिल्म को लेकर उत्साह बढ़ गया है. धर्मेंद्र इस फिल्म में 21 साल के परमवीर चक्र विजेता अरुण खेत्रपाल के पिता बने हैं और अगस्त्य नंदा उनकी बहादुरी की सच्ची कहानी बड़े पर्दे पर दिखाने जा रहे हैं.

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Babli Rautela

मुंबई: फिल्म इक्कीस का नया पोस्टर रिलीज होते ही दर्शकों के बीच उत्साह एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. मैडॉक फिल्म्स की इस मोस्टअवेटेड फिल्म में अनुभवी एक्टर धर्मेंद्र और युवा स्टार अगस्त्य नंदा अहम किरदार में नजर आएंगे. क्रिसमस के मौके पर 25 दिसंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली यह फिल्म भारत के सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र से सम्मानित सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की असली कहानी पर आधारित है.

फिल्म को श्रीराम राघवन ने डायरेक्ट किया है, जिन्होंने अरिजीत बिस्वास और पूजा लाधा सुरती के साथ मिलकर इसकी कहानी भी लिखी है. पोस्टर आउट होते ही फिल्म ने हर जगह जबरदस्त चर्चा शुरू कर दी है.

कब रिलीज होगी फिल्म इक्कीस?

मेकर्स ने इंस्टाग्राम पर फिल्म का नया पोस्टर शेयर करते हुए घोषणा की कि इक्कीस को 25 दिसंबर को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा. पोस्टर में लिखा था कि बहादुरी इस क्रिसमस बड़े पर्दे पर उतरेगी. फिल्म का फोकस 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में हुए बसंतर की लड़ाई पर है, जहां 21 साल की उम्र में अरुण खेत्रपाल ने अपनी जान देकर देश की रक्षा की थी.

मेकर्स के शेयर किए हुए नए पोस्टर में धर्मेंद्र को सबसे अलग और बेहद भावुक अंदाज में दिखाया गया है. फिल्म में वह अरुण खेत्रपाल के पिता का रोल निभा रहे हैं. पोस्टर में लिखा है कि पिता बेटे को बड़ा करते हैं और लेजेंड्स देश को आगे बढ़ाते हैं. धर्मेंद्र का यह लुक साफ बताता है कि फिल्म में उनका किरदार भावनाओं से भरा हुआ है. यह भूमिका उनके अनुभव और उनकी गहरी स्क्रीन मौजूदगी से और भी प्रभावशाली हो जाती है.

अगस्त्य नंदा बनेंगे अरुण खेत्रपाल

अगस्त्य नंदा, जिन्होंने द आर्चीज से अपना एक्टिंग डेब्यू किया था, अब इक्कीस में एक सच्चे हीरो का किरदार निभा रहे हैं. फिल्म में वह सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की भूमिका में नजर आएंगे. सिर्फ 21 साल की उम्र में अरुण खेत्रपाल ने टैंक रेजिमेंट में रहते हुए बसंतर की लड़ाई में बहादुरी से दुश्मन का सामना किया था.

उनके साहस को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया. भारत के सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र विजेता के जीवन को पहली बार बड़े पर्दे पर दिखाया जाएगा.