महेश ट्यूटोरियल्स ने महाराष्ट्र में बंद किए 33 कोचिंग सेंटर, 2500 छात्रों पर पड़ेगा असर
महेश ट्यूटोरियल्स की पैरेंट कंपनी एमटी एजुकेयर दिसंबर 2022 से दिवालियापन की प्रक्रिया से गुजर रही है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने यह केस स्वीकार किया था. कंपनी के आखिरी ऑडिट रिपोर्ट में भारी नुकसान और लगभग 74.29 करोड़ रुपये के बकाए का जिक्र है. प्रमोटर महेश शेट्टी के खिलाफ भी व्यक्तिगत दिवालियापन की कार्यवाही चल रही है.
मुंबई: प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान महेश ट्यूटोरियल्स ने अचानक महाराष्ट्र भर में अपने 33 सेंटर बंद कर दिए हैं. इस फैसले से करीब 2500 छात्रों पर असर पड़ा है. सबसे बड़ी बात यह है कि नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एडमिशन हो चुके थे और फीस भी जमा कर ली गई थी. छात्र और अभिभावक इस खबर से काफी सदमे में हैं.
7 जुलाई को ब्रांच हेड्स की मीटिंग के बाद 10 जुलाई से सभी 33 सेंटरों पर पढ़ाई बंद कर दी गई. शिक्षक और स्टाफ भी अनिश्चितता में हैं. कई जगहों पर क्लासेस अचानक रुक गईं, जिससे छात्रों की तैयारी प्रभावित हो रही है.
कंपनी पर पहले से चल रहा है दिवालियापन का केस
महेश ट्यूटोरियल्स की पैरेंट कंपनी एमटी एजुकेयर दिसंबर 2022 से दिवालियापन की प्रक्रिया से गुजर रही है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने यह केस स्वीकार किया था. कंपनी के आखिरी ऑडिट रिपोर्ट में भारी नुकसान और लगभग 74.29 करोड़ रुपये के बकाए का जिक्र है. प्रमोटर महेश शेट्टी के खिलाफ भी व्यक्तिगत दिवालियापन की कार्यवाही चल रही है.
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अभिभावक अब फीस वापसी की मांग कर रहे हैं. कई माता-पिता फीस ऑडिट कराने और बाकी समय की फीस प्रो-राटा (आनुपातिक) आधार पर लौटाने की बात कह रहे हैं. छात्रों की पढ़ाई बीच में छूटने से उनका भविष्य प्रभावित होने का डर है.
आरिहंत एकेडमी ने दिया सहारा
इस मुश्किल वक्त में आरिहंत एकेडमी ने छात्रों की मदद का फैसला किया है. कंपनी ने 17 जुलाई को जारी प्रेस रिलीज में कहा कि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) के चुनिंदा ब्रांचेस में महेश ट्यूटोरियल्स के योग्य छात्रों को बिना किसी अतिरिक्त फीस के एडमिशन दिया जाएगा. छात्रों को सिर्फ अपने कोर्स की बाकी बची फीस ही जमा करनी होगी.
आरिहंत एकेडमी का यह कदम छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत की खबर है, लेकिन सभी 33 सेंटरों के छात्रों को यह सुविधा मिल पाएगी या नहीं, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है.
छात्रों-शिक्षकों में चिंता
बंद हुए सेंटरों में पढ़ रहे छात्र अब नए कोचिंग सेंटर की तलाश में हैं. कुछ छात्रों ने कहा कि साल के बीच में सब कुछ बदलना काफी मुश्किल है. शिक्षक भी वेतन और नौकरी को लेकर चिंतित हैं. एमटी एजुकेयर की आर्थिक समस्याएं लंबे समय से चल रही थीं, लेकिन अचानक इतने सेंटर बंद करने का फैसला अभिभावकों को नाइंसाफी भरा लग रहा है. शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों से अब इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की जा रही है ताकि छात्रों का नुकसान कम से कम हो.